तीन राज्यों ने लागू नहीं किया नया MV Act, दिये अजीबो-गरीब तर्क जिसे सुनकर हंस पड़ेंगे आप

नई दिल्ली:- एक सितंबर से देश भर में संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट (MV Act) लागू कर दिया गया है। केंद्र सरकार द्वारा तैयार संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट में भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। पहले के मुकाबले, संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट में कई गुना ज्यादा जुर्माने का प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार ने राज्यों को छूट दे रखी है कि वह संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट को लागू करने करने या न करने अथवा इसमें जुर्माने के प्रावधानों पर फैसला ले सकते हैं।
इसके बाद तीन राज्यों ने एक सितंबर से देश भर में लागू हुए संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट को अपने यहां लागू करने से इंकार कर दिया है। इनमें से एक भाजपा शासित और दो अन्य गैर भाजपा शासित राज्य है। नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू न करने के पीछे इन राज्यों के अपने तर्क है। इसका मतलब ये है कि इन चार राज्यों के वाहन चालकों को यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर अब भी पुराना जुर्माना ही देना होगा।
वहीं रांची में ट्रैफिक पुलिस का सॉफ्टवेयर अपडेट न होने की वजह से संशोधित एक्ट के तहत वाहन चालकों का जुर्माना नहीं हो किया जा सका। यहां लोगों से पुराना जुर्माना ही वसूला गया। रांची में सॉफ्टवेयर अपडेट कर जल्द इसे लागू करने का प्रयास किया जा रहा है।
जिन तीन राज्यों ने संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट को लागू करने से इंकार किया है, उसमें गैर भाजपा शासित मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और भाजपा शासित राज्य हिमाचल प्रदेश शामिल है। गैर भाजपा शासित राज्यों ने संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट को लेकर विरोध भी शुरू कर दिया है।
मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार का तर्क है कि वह संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट में किए गए जुर्माने के भारी प्रावधानों से सहमत नहीं है। इसलिए राज्य में फिलहाल इसे लागू नहीं किया गया है। हालांकि राजस्थान में कांग्रेस की ही गहलोत सरकार ने संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट को लागू कर दिया है। इस संबंध में रविवार को जानकारी देते हुए गहलोत सरकार के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा था कि उन्होंने नए मोटर व्हीकल एक्ट को लागू तो कर दिया है, लेकिन वह जुर्माने की समीक्षा करेंगे।
मध्य प्रदेश व पश्चिम बंगाल सरकार का तर्क है कि संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट से सड़क दुर्घटनाएं और बढ़ेंगी। जुर्माने की राशि इतनी होनी चाहिए कि लोग उसे भर सकें। भारी जुर्माना लागू होने के बाद अगर पुलिस वाला किसी कार या बाइक चालक को रोकेगा तो उसे लगेगा 2000 रुपये का चालान हो जाएगा। इतने भारी जुर्माने से बचने के लिए वह गाड़ी को तेजी से भगाएगा, ताकि किसी भी तरह पुलिस वाले से बच सके। ऐसे में दुर्घटनाएं कम होने की जगह और बढ़ेंगी। इससे दुर्घटनाएं रोकने का मकसद पूरा नहीं होगा।
मध्य प्रदेश की तरह ही पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार ने भी भारी जुर्माने के साथ संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट को लागू करने से साफ मना कर दिया है। ममता सरकार का भी तर्क है कि संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट में जुर्माने की राशि इतनी ज्यादा है कि वह आम आदमी की पहुंच से बाहर है।
राजस्थान सरकार के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास का मानना है कि ज्यादा जुर्माने से दुर्घटनाओं का कोई संबंध नहीं है। जुर्माना राशि बढ़ने से केवल भ्रष्टाचार बढ़ेगा। संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट को लागू तो कर दिया गया है, लेकिन सोमवार को इस संबंध में एक बैठकर कर जुर्माना राशि की समीक्षा की जाएगी। बैठक में जुर्माना राशि को कम करने पर विचार किया जाएगा। हांलाकि उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि वह केंद्र सरकार के फैसले या संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट को चैलेंज नहीं कर रहे हैं।
राजस्थान के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के अनुसार देश में इस समय आर्थिक मंदी का दौर चल रहा है। देश में बहुत से लोग ऐसे हैं जो मोटरसाइकिल पर तो चलते हैं, लेकिन सुबह-शाम पेट भरने की व्यवस्था तक नहीं कर पाते हैं। अगर उसका 20 हजार रुपये का चालान हो गया तो वह गाड़ी कैसे छुड़ा पाएगा। ऐसे में जब वह घर जाएगा तो उसका बच्चा रोकर पूछेगा, ‘पापा गाड़ी कहां हैं’? केंद्र सरकार ने आर्थिक मंदी के दौर में 500 के जुर्माने को 5000 रुपये और 2000 रुपये के जुर्माने को बढ़ाकर सीधा 25000 रुपये कर दिया है।
भाजपा शासित राज्य हिमाचल प्रदेश में भी संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट को लागू नहीं किया गया है। राज्य में अब तक केंद्र सरकार के संशोधित एक्ट को लागू करने के लिए नोटिफिकेशन जारी ही नहीं हुआ है। हिमाचल सरकार के यातायात विभाग के शिमला से अतिरिक्त आयुक्त ने इस संबंध में एक नोट जारी किया है। इसमें बताया गया है कि विभाग को संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट से संबंधित कई तरह सवाल प्राप्त हुए हैं। इसलिए सरकार ने फिलहाल नए नियमों को लागू नहीं किया है। राज्य सरकार, केंद्र के संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट से सहमत है या नहीं ये स्पष्ट नहीं है और न ही सरकार की तरफ से ये स्पष्ट किया गया है कि वह कब तक नए नियमों को लागू करेगी।

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