हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी आज

किशनगंज :- देशभर में महिलाएं आज अपने पतियों की लंबी उम्र के लिए हरतालिका तीज का व्रत रखेंगी तो वहीं भगवान गणेश के भक्त गणेश मूर्ति स्थापित कर गणेश चतुर्थी का 10 दिवसीय उत्सव शुभारंभ करेंगे। तीजा और गणेश चतुर्थी दोनों एक साथ इसलिए मनाई जाएंगी क्योंकि आज 2 सितंबर को शुक्त पक्ष तृतीया तिथि और चतुथी तिथि दोनों हैं। आज दोपहर 11:55 बजे से चतुर्थी तिथि शुरू हो रही है। जबकि दोपहर 11:55 तक तृतीया तिथि है। तृतीया की उदया तिथि के कारण आज सोमवार को बेहद दुर्लभ शुभ संयोग में भगवान शिव पार्वती को समर्पित व्रत और पर्व हरतालिका तीज आज ही मनाया जा रहा है।

तीज का कठीन व्रत आज

हरतालिका तीज यानी तीज का कठिन व्रत आज मनाया जा रहा है। व्रत रखने वाली महिलाएं कल 12 बजे रात से पानी और खाना छोड़ चुकी हैं। पूरे दिन पूजा पाठ करने के साथ ही आज रात्रि जागरण भी करेंगी। इसके अगले दिन यानी मंगलवार को सुबह भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने के बाद व्रत का पारण कर अन्न जल ग्रहण करेंगी। यानी व्रत के दौरान इन 24 घंटों तक वह बिजा जल और भोजन के ही रहेंगी।

भगवान गणेश को ज्ञान, बुद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। भगवान गणेश को गजानन, गजदंत, गजमुख जैसे नामों से भी जाना जाता है। हर साल की तरह इस बार भी गणेश चतुर्थी का पर्व हर साल हिन्दू पंचाग के भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को शुरू हो रहा है। इस बार गणेश चतुर्थी आज 2 सितंबर को शुरू हो रही है। दो सितंबर को ही लोग भगवान गणेश की मूर्ति स्थापति कर अगले 10 दिन तक गणेश उत्सव मनाएंगे।

पंचांग के अनुसार अभिजित मुहूर्त सुबह लगभग 11.55 से दोपहर 12.40 तक रहेगा। इसके अलावा पूरे दिन शुभ संयोग होने से सुविधा अनुसार किसी भी शुभ लग्न या चौघड़िया मुहूर्त में गणेश जी की स्थापना कर सकते हैं। 12 सितंबर को गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा।

मध्यान्ह गणेश पूजा : दोपहर 11:05 से 01:36 तक

चंद्रमा न देखने का समय : सुबह 8:55 बजे से शाम 9:05 बजे तक

सुबह 8:55 बजे से शाम 9:05 बजे तक

गणेशोत्सव से जुड़ी कथाऐं

इस दिन लोग मिट्टी से बनी भगवान गणेश की मूर्तियां अपने घरों में स्थापित करते हैं। गणेश चतुर्थी का उत्सव मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा से शुरू होती है। इस पूजा के 16 चरण होते हैं जिसे शोदशोपचार पूजा के नाम से जाना जाता है। इस पूजा के दौरान भगवान गणेश के पसंदीदा लड्डू का भोग लगाया जाता है। इसमें मोदक, श्रीखंड, नारियल चावल, और मोतीचूर के लड्डू शामिल हैं। इन 10 दिनों के पूजा उत्सव में लोग रोज सुबह शाम भगवान गणेश की आरती नियमित रूप से करते हैं। व्यवस्था के अनुसार आयोजक भजन संध्या का भी आयोजन करते हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार माता पार्वती स्नान करने से पहले चंदन का उपटन लगा रही थीं। इस उबटन से उन्होंने भगवान गणेश को तैयार किया और घर के दरवाजे के बाहर सुरक्षा के लिए बैठा दिया। इसके बाद मां पार्वती स्नान करने लगे। तभी भगवान शिव घर पहुंचे तो भगवान गणेश ने उन्हें घर में जाने से रोक दिया। इससे भगवान शिव क्रोधित हो गए और गणेश सिर धड़ से अलग कर दिया। मां पार्वती को जब इस बात का पता चला तो वह बहुत दुखी हुईं। इसके बाद भगवान शिव ने उन्हें वचन दिया कि वह गणेश को जीवित कर देंगे। भगवान शिव ने अपने गणों से कहा कि गणेश का सिर ढूंढ़ कर लाएं। गणों को किसी भी बालक का सिर नहीं मिला तो वे एक हाथी के बच्चे का सिर लेकर आए और गणेश भगवान को लगा दिया। इस प्रकार माना गया कि हाथी के सिर के साथ भगवान गणेश का दोबारा जन्म हुआ। मान्यताओं के अनुसार यह घटना चतुर्थी के दिन ही हुई थी। इसलिए इस दिन को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है।

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