जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग रांची विवि द्वारा आयोजित करमा महोत्सव पर राज्यपाल ने कहा करमा पूजा उत्साह एवं उमंग का पर्व


रांची : रउरे मनके जोहार! सर्वप्रथम सभी को प्रकृति पर्व करमा पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं दी। कहा कि झारखंड राज्य में पूरे उत्साह एवं उमंग के साथ मनाए जानेवाले इस अहम त्योहार के अवसर पर आप सभी लोगों के बीच सम्मिलित होकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। करमा पूजा उत्साह एवं उमंग का पर्व है। प्रकृति एवं मानव के बीच गहरे व अटूट तथा अनुपम संबंध को यह दर्षाता अथवा परिलक्षित करता है। इस प्रकृति पर्व से जुड़ी लोक-कथाओं में सकारात्मक संदेश निहित है। यह पर्व हम सभी को अपने जीवन में अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देता है। श्रद्धा एवं भक्ति के साथ करम पेड. की डाल को आंगन में लगाकर पूजा करना एवं सामूहिक नृत्य एवं संगीत के साथ खुशियां मनाना इस पर्व की अहम विशेषता है। हमारा जनजातीय समाज प्रकृति प्रेमी है। प्रायः हर पर्व में प्रकृति के प्रति आस्था व्यक्त की जाती है। आज संपूर्ण विश्व पर्यावरणीय समस्या से ग्रसित है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण सूखा, अल्पवृष्टि, अनावृष्टि, अत्यधिक गर्मी तथा ग्लेसियर का पिघलना जैसी घटनाएं सामने आ रही है। इस वर्ष हमने अपने रांची, जो कभी अविभाजित बिहार की ग्रीष्मकालीन राजधानी कही जाती थी, यहां भी अत्यंत गर्मी का प्रकोप देखने को मिला। राज्य में अपेक्षित वर्षा नहीं हुई। विभिन्न अंतराष्ट्रीय मंचों पर पर्यावरण संतुलन की दिशा में कार्य करने पर सघन विचार हो रहा है, ताकि मानव एवं अन्य जीव-जंतुओं की रक्षा हो सकें। ऐसे में करमा पर्व पर्यावरण संतुलन की दिशा में संपूर्ण विश्व के समक्ष एक बेहतर उदाहरण प्रस्तुत करता है। विगत दिनों 6 सितंबर को जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के विद्यार्थियों द्वारा राजभवन में करमा पर्व के पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में अद्भूत कला का प्रदर्शन किया गया। यहां के विद्यार्थियों ने अपने नृत्य, कला एवं संस्कृति का जो मनमोहक प्रस्तुति पेश की, उसकी जितनी सराहना की जाए वह कम है। मैं जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग रांची विवि की प्रगति के प्रति सदैव चिंतनशील रहती हूं। यहां सभी 9 भाषाओं के शिक्षकों के पद सृजन की दिशा में कार्रवाई हो रही है। मैं सदा विभाग से विभिन्न जनजातीय भाषकी लिपि की ओर भी ध्यान देने के लिए कहती हूं। आशा है कि विभाग का नया स्वरूप तथा अखाडा सीघ्र ही निर्मित हो जाएगा। यहां विद्यार्थी सुचारू रूप से अध्ययन करेंगे तथा इनोवेशन आइडियां के साथ रिसर्च की ओर ध्यान देंगे। इस असवर पर कहा कि आपलोग जनजातीय भाई-बहनों में जागरूकता लाने का भी कार्य करें। आप सभी बुद्धिजीवी हैं और बुद्धिजीवी का कर्ताव्य होता है कि वह सिर्फ अपने तक सीमित नहीं रहता है। वह ज्ञान की रौषनी आस-पड़ोस भी फैलाता है। आज जनजातियों में स्वास्थ्य, पोषण संबंधी गंभीर समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति अत्यंत समृद्ध है। यहां विविध धर्म, समुदाय, भाषा तथा संस्कृति के लोग निवास करते हैं। हमारा देश अनेकता में एकता का अनुपम एवं सुंदर उदहारण प्रस्तुत करता है। यहां की यह भी
विशेषता है कि प्रत्येक पर्व-त्योहार सभी समुदाय के लोग एकसाथ हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। यही सब विशिष्टता हमारी प्रदेश की बहुरंगी संस्कृति एवं भारतवर्ष की विविधता में एकता की मिसाल पेश करती है।

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