वाहन चेकिंग के नाम पर जनता का अपमान बंद करें सरकार: केएन त्रिपाठी

रांची: सरकार ने जो परिवहन अधिनियम कानून बनाया है उसमें मोटरसाइकिल वाहन चलाने वाले को काफी परेशानी व दिक्कत का सामना करना पड. रहा है। वाहन चेकिंग के नाम पर फिरौती, शोषण, अपमान जनता का सरकार बंद करें। उक्त बातें पूर्व मंत्री कांग्रेस नेता केएन त्रिपाठी ने कही। उन्होंने कहा यदि किसी व्यक्ति का वाहन है 35 हजार का और फाइन भी है तकरीबन 25 हजार  का, तो इस कानून को बनाने वालों ने यह नहीं समझा कि दूरदराज के गांवों में  10 से 20 वर्ष के लोग मोटरसाइकिल चलाते हैं। जिस गरीब परिवार के व्यक्ति जिसके वाहन का 15 वर्ष हो गया है, उसका इश्योरेंस नहीं हो सकता और अगर इश्योरेंस होगा ही नहीं तो तो उस गाड.ी पर भारी भरकम जुर्माना लगा दिया जाता हैं। वैसे भी 15 वर्ष के बाद वाहन की कीमत घटकर के 10 से 15 हजार रुपए हो जाता हैं और उस वाहन पर फाइन लगभग 24 से 25000 हजार रूपए लग जाएगा तो उस गरीब परिवार का क्या होगा? जिस गरीब व्यक्ति का उम्र 60 वर्ष से उपर है तो न ही उस व्यक्ति का इश्योरेंस होगा और न ही उसका ड्राइविंग लाइसेंस निर्गत किया जाएगा, वैसे भी ड्राइविंग लाइसेंस 60 वर्ष के नीचे व्यक्ति का बनता है। ऐसे में गरीब परिवार 24 से 25000 हजार रूपए का जुर्माना कहां से भरेगा। 60 वर्ष के उपर गांव का गरीब व्यक्ति अपने रोजमर्रा के समान लेने के लिए शहर जाता हैं तो पुलिस वाहन चेकिंग के दौरान अगर पुलिस के गिरफ्त मे आ जाता हैं तो वह व्यक्ति जुर्माना भरेगा या अपने बच्चे का जान बचाएगा। इस वाहन चेकिंग से लोग काफी परेशान हैं। अमूमन प्रायः गांवों में वाहन के जरूरी दस्तावेज व कागजात एवं इश्योरेंस न होने की वजह से 15 से 20 वर्ष पुरानी वाहनों का प्रयोग करते हैं, उनके पास महत्वपूर्ण वाहन के दस्तावेज न होने की वजह से ट्रैफिक पुलिस उनपर भारी जुर्माना लगा देते हैं, जो बहुत ही अन्यायपूर्ण व दुर्भाग्यपूर्ण है। पूरे झारखंड राज्य में हाहाकार मचा हुआ है। पुलिस इस कानून में आम जनता के पैसों  का घूस ’एक्सटार्शन’ लेने का माध्यम हो गया है। यह कानून आमलोगों में भय पैदा करने का कानून बन गया है। अगर कोई गरीब व्यक्ति अपने कार्य से शहर जाता हैं तो जुर्माना भरकर के आईए अथवा विभाग में जाकर सारा कागजात बनवाते रहिए। पुलिस आमलोगों को, सम्मानित लोगों को, नवयुवकों को अपमानित कर रही हैं, यह सबसे बड.ा दुखद है। यह परिवहन अधिनियम कानून राज्य सरकार जो केंद्र सरकार का यह कानून है इस नियम को स्थगित करें और इसे लागू नहीं करें। इसकी मै मांग करता हूं।

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