हेमंत सोरेन को पिछड़ा आरक्षण पर बोलने का हक नहीं:रामचन्द्र सहिस

रांची: आजसू पार्टी के विधायक और सरकार मे मंत्री रामचंद्र सहिस ने कहा है कि झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन को पिछड़ा आरक्षण पर बोलने का हक नहीं बनता। इससे पहले उन्होंने इस मुद्दे की चिंता नहीं की। अब चुनाव देख वे आरक्षण की दुहाई दे रहे हैं, जबकि आजसू पार्टी के लिए यह मुद्दा अहम रहा है और झारखंड राज्य में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का दायरा 14 फीसदी से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के लिए सबसे ज्यादा आजसू पार्टी ने आवाज उठाई है। मंत्री सहिस ने शुक्रवार को आजसू के कार्यालय में प्रेस कांफ्रेस कर हेमंत सोरेन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन को यह बताना चाहिए कि ठीक चुनाव के वक्त इस मुद्दे की याद उन्हें कैसे आई। सहिस ने यह भी कहा कि जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा की बात करने वाले हेमंत ने सबसे ज्यादा और पहले सीएनटी-एसपीटी एक्ट का उल्लंघन किया है। प्रेस कांफ्रेस में पार्टी के विधायक राजकिशोर महतो के अलावा राजेंद्र मेहता, देवशरण भगत और सुबोध प्रसाद, वनमाली मंडल भी मौजूद थे। सहिस ने कहा हमारी पार्टी ने तर्क और तथ्य के साथ इस मुद्दे पर सरकार का कई दफा ध्यान भी खींचा है। झारखंड में पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण मिलना उनका संवैधानिक अधिकार है। एकीकृत बिहार में भी पिछड़े वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण हासिल था। अलग राज्य में उन्हें 14 फीसदी का भागीदार बना दिया गया है। मंत्री ने कहा कि आरक्षण के मसले पर साल 2001 में अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया गया था। इस उपसमिति में पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो भी शामिल थे। उपसमिति ने राज्य में अनुसूचित जनजाति को 32, पिछड़ा वर्ग को 27 तथा अनुसूचित जाति को 14 फीसदी यानि कुल 73 फीसदी आरक्षण देने की अनुशंसा की थी। साल 2002 में झारखंड में 73 फीसदी आरक्षण को लेकर एक संकल्प जारी किया गया था। बाद में उसे झारखंड हाइकोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट के आदेश के आलोक में सरकार ने सेवाओं की नियुक्तियों में 50 फीसदी आरक्षण सीमित रखने का निर्णय लिया, जबकि सरकार को शासनिक और न्यायिक स्तर पर इस मामले में पहल करनी चाहिए थी। विधायक राजकिशोर महतो ने कहा कि तामिलनाड़ु, केरल, हरियाणा हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में पिछड़ों को 30 से 50 प्रतिशत तक आरक्षण हासिल है। राज्य की सरकारें आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा सकती है। हाल ही में छत्तीसगढ. की सरकार ने आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 82 प्रतिशत कर दिया है। आजसू पार्टी झारखंड में पिछड़ा वर्ग के लिए इसी पैर्टन पर आरक्षण बढ़ाने की मांग करती रही है, ताकि पिछड़ों के साथ अनुसूचित जाति और जनजाति को भी लाभ मिले। आजसू पार्टी इस बात की पक्षधर रही है कि मेधा सूची में पिछड़ा वर्ग के जो युवा आते हैं उन्हें कोटा में सीमित नहीं किया जाए। मेधा सूची में उपर रहने वालों को सामान्य श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए। इससे पिछड़ों का हक और उन्हें अपने वर्ग का प्रतिनिधित्व करने का मौका भी मिलेगा। साथ ही पार्टी ने पहले ही निजी क्षेत्रों में भी आरक्षण लागू करने की वकालत की है। आजसू नेताओं ने कहा कि इसी साल 17 फरवरी को रांची में अखिल भारत पिछड़ा वर्ग सभा और आजसू पार्टी की इकाई अखिल झारखंड पिछड़ा वर्ग महासभा के बैनर तले राष्ट्रीय अधिवेशन सह प्रतिनिधि सम्मेलन का आयोजन किया गया था। आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो ने मुख्य अतिथि के तौर पर भाग लेते हुए इस सम्मेलन में जोर दिया था कि आरक्षण सिर्फ आर्थिक नहीं, प्रतिनिधित्व और भागीदारी का सवाल है। महज आर्थिक तानाबाना से जोड़कर इसे देखा जाना बड़ी आबादी के संवैधानिक हितों की अनदेखी है। आजसू नेताओं ने कहा कि इससे पहले बीते साल 10 दिसंबर को आजसू पार्टी की केंद्रीय कार्यसमति की बैठक में झारखंड में पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव पारित किया गया है। इसके बाद 17 दिसंबर को पार्टी के सहयोगी संगठन अखिल झारखंड पिछड़ा वर्ग के महासम्मेलन में भी पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग दोहराई गई। सामाजिक न्याय आजसू की विचारधारा में शामिल है।

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