पीएम के जन्मदिन को सेवा दिवस के रूप में मनाएगी झारखंड सरकार, नई विधानसभा के विशेष सत्र में विशेष घोषणा

रांची: विकास की नई उंचाई को पाने के संकल्प के साथ शुक्रवार को नए विधानसभा भवन में राज्य की चौथी विधानसभा का समापन हो गया। नए विधानसभा भवन में आयोजित एकदिवसीय विशेष सत्र में जहां सत्तापक्ष सरकार की उपलब्धि गिनाते हुए नजर आया, वहीं प्रमुख विपक्षी दल झामुमो ने सदन से दूरी बना ली। हालांकि कांग्रेस और वामदल ने सरकार को जरूर आइना दिखाया। 19 वर्षों के बाद झारखंड को अपना विधानसभा भवन मिला है। गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी ने इसका उद्घाटन किया। जिसके बाद शुक्रवार को नए विधानसभा भवन में विशेष सत्र बुलाया गया। विशेष सत्र की शुरुआत राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से हुई। सदन को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने राज्य सरकार की उपलब्धि गिनाते हुए नए विधानसभा भवन के लिए शुभकामनाएं दी। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नए विधानसभा भवन के सेंट्रल हॉल में करीब ढाई घंटे विशेष सत्र चली। इस दौरान विस अध्यक्ष दिनेश उरांव, मुख्यमंत्री रघुवर दास और उपस्थित विधायक ने सदन को संबोधित किया। इस दौरान मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पीएम मोदी के बर्थडे 17 सितंबर को सेवा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की और कहा कि उस दिन राज्य में 1600 किलोमीटर ग्रामीण सड.कों का प्रधानमंत्री ग्राम सड.क योजना के तहत शिलान्यास होगा। जिसपर 1037 करोड. खर्च होंगे।

एक नजर में चौथी विधानसभा

चौथी विधानसभा के कार्यकाल में 17 सत्र में 127 कार्य दिवस हुए, 6 अवसरों पर राज्यपाल ने सदन को संबोधित किया, 130 विधेयक सदन में लाए गए, जिसमें 127 पारित हुए, विधायकों से 9455 प्रश्न सदन में लाए गए, जिनमें से 2118 अल्पसूचित, 6051 तारांकित और 1086 अतारांकित रूप में स्वीकार किए गए, 506 मौखिक उत्तर सदन में सरकार की ओर से दी गई, अन्य लिखित रूप से विधायकों को मिला, शून्यकाल के दौरान 1945 सूचनाएं प्राप्त हुई, जिनमें से 1907 को स्वीकृति दी गई। आम तौर पर हल्ला और हंगामे की भेंट चढ.ने वाली सदन की कार्यवाही विशेष सत्र के दौरान बेहद ही खुशनुमा माहौल में गुजरी। झामुमो की गैरहाजिरी में कांग्रेस और झाविमो विधायकों ने प्रमुख विपक्ष की भूमिका निभाते दिखे। न्यायिक हिरासत में सदन की कार्यवाही में भाग लेने आए झाविमो विधायक प्रदीप यादव ने सरकार को आड.े हाथों लिया। वहीं कांग्रेस की ओर से आलमगीर आलम, इरफान अंसारी और सुखदेव भगत ने सदन में सरकार की विफलताओं गिनाई। झारखंड के गठन के बाद से विधानसभा किराए के भवन में चल रही थी, लेकिन 19 साल बाद झारखंड को अब अपना विधानसभा भवन मिल गया है।

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