राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू ने विधानसभा के नये भवन में चतुर्थ विधानसभा के विशेष सत्र को सम्बोधित किया

रांची:- लगभग 39 एकड. क्षेत्र में फैला हुआ अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त ग्रिहा थ्री स्टार के अनुरूप ग्रीन बिल्डिंग की अवधारणा से परिपूर्ण यह भवन, सिर्फ ईटों और पत्थरों से बना एक भव्य भवन ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र का जीवंत मंदिर है। यह उनलोगों के सपनों और अभिलाषाओं का जीता-जागता प्रमाण है, जिनका आप प्रतिनिधित्व करते हैं। उक्त बातें राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू ने विधानसभा के नए भवन चर्तुथ विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि झारखंड की चतुर्थ विधानसभा के इस 17वें विशेष सत्र में आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अपार प्रसन्नता हो रही है। गुरूवार को ही प्रधानमंत्री द्वारा इस नवनिर्मित झारखंड विधानसभा भवन का उद्घाटन किया गया। राज्य विधानमंडल के प्रमुख होने के नाते मुझे शुक्रवार को इस नए विधानसभा भवन के निर्मित होने पर अत्यंत प्रसन्नता एवं गौरव है। अवगत कराया गया है कि झारखंड विधानसभा का यह नवनिर्मित भवन नेशनल बिल्ंिडग कोड-2015 के आलोक में तैयार किया गया है। इस भवन का निर्माण इनर्जी सेविंग्स के नवीनतम तकनीक पर आधारित होना अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का कार्य करेगा। इस भवन में वर्षा जल संचयन एवं वाटर रीसाइक्लीन प्लांट द्वारा जल संरक्षण को भी महत्व दिया गया है। इस भवन में झारखंड राज्य की कला-संस्कृति एवं प्रचलित चित्रकारी को पर्याप्त स्थान देना सराहनीय है। 15 नवंबर 2000 को झारखंड का भारतीय संघ के 28वें राज्य के रूप में गठन हुआ और यहां के विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार प्राप्त हुआ। इस विधानसभा के सभी पुराने और वर्तमान सदस्यों ने राज्यहित में कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं तथा जनहित की समस्याओं के निदान एवं राज्य के विकास की दिशा में कई सफलताएं भी अर्जित की है, लेकिन उस गति को हम सभी को दलगत भावना से उपर उठकर और तेज करने की आवश्यकता है। हम भारत के लोग यानि ’वी द पीपुल ऑफ इंडिया’ हमारे संविधान की प्रस्तावना इन्हीं शब्दों से शुरू होती है। हमें यह याद रखना होगा कि प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए और उनकी सेवा के लिए ही आप सब इस विधानसभा के सदस्य चुने गए हैं। विधानसभा सदस्य के रूप में आपको राज्य सूची में शामिल विषयों पर कानून बनाने का एकाधिकार है, जिनका सीधा संबंध लोगों और उनके जीवन के कल्याण से है। विधानसभा का दायित्व है कि राज्य का सर्वोच्च प्रतिनिधि संस्था होने के नाते लोगों की इच्छा को मूर्तरूप प्रदान करने के लिए कार्य करे। अतः विधायकों के रूप में आपका यह मूल कर्तव्य है कि आप कार्यपालिका के कार्य निष्पादन की निगरानी करें और लोगों की समस्याओं के प्रति सजग, सचेत तथा जवाबदेह रहें। कार्यपालिका संविधान के अंतर्गत विधायिका के समक्ष किए गए कार्यों का आवश्यकतानुसार ब्यौरा प्रस्तुत करती है, लेकिन प्रश्न यह है कि आप एक विधानसभा सदस्य के रूप में कितने प्रभावी तरीके से सभा अथवा समिति में सरकारी कार्यों की गहन जांच करने में समर्थ होते हैं। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि जनता अपने क्षेत्र के प्रतिनिधि का चयन बहुत अपेक्षा, आशा और विश्वास के साथ करती है। ये प्रतिनिधि उनकी समस्याओं के निराकरण तथा क्षेत्र के विकास के लिए उत्तरदायी होते हैं। देश व राज्य के विकास की गति के लिए संसद एवं विधानमंडल को ही जिम्मेदार माना जाता है, इस बात का ध्यान हमेशा हमारे सभी विधायकगण और मंत्रिमंडल के सदस्यगण रखें। सोशल मीडिया के वर्तमान व्यापक दौर में जनता यह देखती और चिंतन करती है कि अन्य राज्यों में जनता के लिए कौन-सी कल्याणकारी योजनाएं संचालित हो रही हैं, इसके क्या प्रभाव हुए हैं और अच्छे परिणाम प्राप्त होने पर इसको अपने यहां भी अपनाने की अपेक्षा करती है। इसलिए हमारे विधायकों को भी इस मामले में सचेष्ट रहना चाहिए। उन्हें अपने यहां संचालित विभिन्न योजनाओं के साथ अन्य प्रदेशों में संचालित योजनाओं से अच्छी तरह अवगत रहना चाहिए। विधानमंडल को सदैव सचेष्ट रहना है कि जनहित के लिए आवश्यकताएं क्या है, उनकी समस्याएं क्या है, ताकि उसके अनुरूप नीतियां बनाई जा सकें। जनप्रतिनिधियों को जनता से राय लेकर और उनकी आवश्यकताओं को बेहतर तरीके से जानकर उन्हें मूर्तरूप प्रदान करने की दिशा में सक्रिय रहने की आवश्यकता है। उन्हें अपने कार्यों में पारदर्शिता रखनी होगी तथा लोगों से अच्छी तरह पेश आना होगा। विभिन्न योजनाओं के संदर्भ में क्षेत्र के लोगों से परिचर्चा भी करनी चाहिए। प्रतिनिधियों की कोशिश होनी चाहिए कि सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचे। जनप्रतिनिधियों में भी एक स्वस्थ कम्पीटीशन होना चाहिए कि किनके क्षेत्र के लोग अधिक खुशहाल हैं और कहां सबसे बेहतर तरीके से योजनाएं संचालित हो रही हैं। जनप्रतिनिधियों को आपस में एक-दूसरे से मित्रवत होकर अपने क्षेत्र की भौगोलिक दशा की परिचर्चा करते हुए विशिष्ट योजनाओं के संदर्भ में चर्चा करना चाहिए। हाल ही में मैं संथाल परगना प्रमंडल के चार दिवसीय दौरे पर गई थीं। इस क्रम में मैंने सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी ली और लोगों के बीच गई। आमजन अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को सफल बनाने के लिए अपना पूरा योगदान देते हैं। किसी कार्य में कठिनाई है तो जनता को उन जटिलताओं से अवगत कराएं। जनता अपने जनप्रतिनिधि को पूर्णतः ईमानदार समझें, ऐसा माहौल बने। रामराज्य की स्थापना की दिशा में जनप्रतिनिधि, जनता और पदाधिकारी एवं कर्मी का ईमानदार होना आवश्यक है। विधानसभा के सदस्यों से कहना चाहूंगी कि सदन के समक्ष कोई अधिनियम पारित करने के लिए लाया जाए तो उसके प्रारूप को वे गंभीरतापूर्वक अध्ययन एवं उस पर मंथन करें। इसके लागू होने से जनता पर पड.ने वाले प्रभाव का चिंतन करें, तभी आप जनता के प्रति अपने कर्तव्यों का बेहतर तरीके से निर्वहन कर पाएंगे। सदन में बेहतर ढंग से वाद-विवाद हो, सबकी बात सुनी जाए। सदस्यगण सदन के समक्ष जनहित में तथ्यपरक विषय लाएं। सूचना तकनीक के इस युग में जनता अपने प्रतिनिधि के सदन में आचरण का आकलन करती है। जनता न केवल अपने क्षेत्र के विधायक द्वारा किए गए प्रश्न को गंभीरतापूर्वक सुनती है, बल्कि सरकार का उसपर क्या विचार है, ये भी जानने को लालायित रहती है। इसे सदैव ध्यान में रखने की जरूरत है। इसलिए सदस्यों को बेहतर तरीके से प्रश्न करना चाहिए और सरकार को उचित जबाब देना चाहिए। सरकार से यदि जनहित की कोई बात छूट जाए तो विपक्ष को इस ओर प्रभावी रूप से ध्यान दिलाना चाहिए, लेकिन इस क्रम में सदन की गरिमा को ठेस न पहुंचे, यह भी ध्यान रखना आवश्यक है। विपक्ष विरोध करने के लिए विरोध न करें, अपनी रचनात्मक भूमिका निभाएं। स्वयं के प्रति ईमानदार रहें। विधानसभा के सभी सदस्य, भारत के संविधान के प्रति सच्ची आस्था और निष्ठा रखने की, भारत की संप्रभुता और अखंडता को कायम रखने की एवं इस सदन के सदस्य के रूप में अपने कर्तव्यों को निष्ठापूर्वक निभाने की शपथ लेते हैं। मुझे सिर्फ आशा ही नहीं, बल्कि पूर्ण विश्वास है कि यह शपथ आपको अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए मार्गदर्शन करती रहेगी। इस विधानसभा के लिए निर्वाचित होने के पश्चात आप अपने क्षेत्र के सभी नागरिकों का प्रतिनिधित्व करते हैं, उनमें वो भी शामिल हैं, जिन्होंने आपको वोट न भी किया हो। आप सभी लोगों के हितों और विश्वास के संरक्षक है। यह आपकी प्रमुख जिम्मेदारी है कि आप लोगों के जीवन को बेहतर बनाने वाले कानून बनाएं और जनमानस की समस्याओं का ईमानदारी से हल ढूंढे। चतुर्थ विधानसभा की अवधि कुछ माह में समाप्त होनेवाली है। चतुर्थ विधानसभा में बहुत से सदस्य प्रथम बार चयनित होकर आए थे और युवा सदस्य भी देखने को मिले। अब आप सभी सदस्यों के कार्यों का आकलन जनता ही पुनः करेगी। हमारे लोकतंत्र की यही विशिष्टता है कि जनता में सारी शक्तियां निहित होती हैं। झारखंड विधानसभा के सभी सदस्यों का आह्वान किया कि जनता-जनार्दन की अपेक्षाओं एवं आकांक्षाओं को पूरा करने, उनकी समस्याओं को सुलझाने के लिए लोकतंत्र के इस मंदिर में सार्थक वाद-विवाद करें। गुण-दोषों का आकलन करें और सर्वसम्मति से राज्यहित में निर्णय लेने का प्रयास करें।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.