बिहार की वर्तमान स्थिति को दर्शाती यह मार्मिक कविता

घर के चारो तरफ है पानी भरा

एक दीवार है जो उसको कई दिनों से रोके खड़ा
पानी भी कोई साफ नहीं उसमें भी है बहुत कचड़ा पड़ा 


एक परिवार है घर के अंदर
जिन्हें बस पानी निकलने का इंतजार है
उनके साथ एक बालक भी है जिसकी उम्र केवल चार है


यही जगह  बची है जो अभी सुखे में है 

इसलिए हर कोने में सांप बिच्छू के होने के भी आसार है 
इस हालत में एक दुसरे से खतरे का अंदाज़ा दोनों को है
पर रहना पड़ेगा दोनो लाचार हैं


वो चार साल का बच्चा अपने पलंग पर चढ़ने की कोशिश कर ही रहा था कि
तभी धराम की आवाज आइ और दीवार गिर पड़ी
पानी सरसरा कर अंदर घुस गया
अब पलंग के नीचे तक था पानी भरा
पास उसके गर्दन भर पानी में जो था बालक खड़ा


मम्मी -2 चिल्ला रहा
खड़ा अपने आंसूओ को बहा रहा
माँ पानी में चभाक चभाक कर भागती आइ
अपने बच्चें को हटा लिया
अपने लाल को चुप कराया और अपने सीने से सटा लिया


दीवार गिरी देख कर बाप ने भी अपना माथा पीटा
पानी में चभर चभर कर के अपने पांव को अपने बच्चे की तरफ घसीटा 
दीवार जो गिरी पड़ी है उसे पिछले साल ही कर्ज ले बनबाया था
गंगा माँ रक्षा करेगी इसलिए पुजा भी करवाया था 


हुआ कुछ नहीं चारो तरफ बस दर्द की भरमार है
आप से भी क्या उम्मीद लगाना आप तो बुद्धिजीवी लोग हैं
आप तो यही कहेंगे डुबने दो “बिहार” है

—- रंजेश सिंह 

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