जेल से निकलने के बाद एनोस ने संभाला मैदान, बेटी आइरिन एक्का कोलेबिरा से लड़ेगी चुनाव

रांची: पारा शिक्षक हत्याकांड में सजायाफ्ता झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का जेल से निकलने के बाद कोलेबिरा विधानसभा क्षेत्र में नइे सिरे से सक्रिय हो गए हैं। एनोस एक्का के साथ ही उनकी झारखंड पार्टी और बेटी आइरिन एक्का की गतिविधियां भी तेज हुई है। इसी सिलसिले में सोमवार को एनोस एक्का ने सिमडेगा जिले के कार्यकर्ता सम्मेलन में आइरिन एक्का की उम्मीदवारी की घोषणा की। सिमडेगा जिले में लसिया के एक पारा शिक्षक मनोज कुमार की हत्या में एनोस एक्का को उम्र कैद की सजा मिली है। इसी महीने की एक तारीख को सशर्त जमानत पर वे जेल से बाहर निकले हैं। इससे पहले बहुचर्चित इस हत्याकांड के एक अन्य अभियुक्त पीएलएफआई उग्रवादी कौलेश्वर महतो को बीते महीने 16 सितंबर को आजीवान कारावाज की सजा दी गई है। इधर, जेल से बाहर निकलने के बाद एनोस पार्टी के कार्यकर्ताओं को लामबंद करने की कोशिशों में जुटे हैं। साथ ही गांव-गांव जाकर यह बताने में लगे हैं कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया। उनकी लगातार बैठकें चल रही है और वे सबसे मिलने-जुलने में लगे हैं। सिमडेगा के कार्यकर्ता सम्मेलन में एनोस एक्का ने कहा कि जेल में कार्यकर्ताओं से दूर रहकर पांच साल को उन्होंने एक युग की तरह बिताया है। इसके साथ ही उन्होंने मेरा एनोस मेरा आंगन अभियान चलाने पर जोर दिया। इस अभियान के तहत झापा के कार्यकर्ता हर घर में जाएंगे और लोगों की समस्या सुनकर यह बताएंगे कि झापा ही इस क्षेत्र का विकास करेगी। एनोस की सीधी नजर गुमला, खूंटी, तोरपा, सिमडेगा, विशनपुर सीट पर भी है, जहां वे उम्मीदवार उतारने की तैयारी में जुटे हैं। एनोस एक्का की बेटी आइरिन एक्का झारखंड पार्टी की युवा मोर्चा की अध्यक्ष हैं और पिछले कुछ महीने से उन्होंने कोलेबिरा से चुनाव लड़ने के मकसद के साथ अपनी सक्रियता बढ़ाई है। कोलेबिरा से अधिकृत तौर पर उम्मीदवारी की घोषणा के बाद आइरिन ने कार्यकर्ताओं को ही पार्टी का दारोमदार बताया है और कहा कि वे बेटी की तरह जनता की सेवा करेंगी। एनोस की पत्नी यानी आइरिन की मां मेनन एक्का सिमडेगा जिला परिषद की अध्यक्ष हैं और एनोस एक्का की सदस्यता समाप्त होने के बाद कोलेबिरा में हुए उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार विक्सल कोंगाड़ी ने मेनन को जोरदार पटखनी दी थी, जबकि मेनन को झारखंड मुक्ति मोर्चा का समर्थन प्राप्त था। पत्नी की करारी हार ने एनोस को अहसास करा दिया था कि उनके कारनामे और आरोपों को लेकर राजनीतिक और चुनावी समीकरणों पर असर पड़ने लगे हैं। विक्सल जमीन से जुड़े रहे हैं और जंगल बचाओ आंदोलन के अगुवा भी। विक्सल की जीत के साथ ही 13 साल बाद कोलेबिरा में कांग्रेस की वापसी हुई थी। जाहिर है इसबार बदल रही परिस्थितियों के बीच चुनाव में उनका भी दम परखा जाएगा, क्योंकि अब प्रत्यक्ष तौर पर एनोस ही बेटी की चुनावी कमान संभालेंगे। गौरतलब है कि 2014 में एनोस एक्का जेल से ही कोलेबिरा विधानसभा चुनाव जीते थे। चुनाव से ठीक पहले शिक्षक मनोज कुमार की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पिछले साल सजा मिलने के बाद उनकी विधायकी खत्म हो गई थी। एनोस पहली बार 2005 में कोलेबिरा से चुनाव जीते थे। झारखंड में अर्जुन मुंडा, मधु कोड़ा और शिबू सोरेन की सरकार में वे मंत्री भी रहे। हालांकि कई मामलो में वे भाजपा की मदद करते रहे हैं। हालांकि 2006 में एनोस एक्का, हरिनारायण राय, मधु कोड़ा ने मिलकर अर्जुन मुंडा का तख्ता पलट भी कर दिया था। बाद में अपराध और भ्रष्टाचार के आरोपों में एनोस फसते चले गए। आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी उनके खिलाफ कार्रवाई चल रही है और प्रवर्तन निदेशालय ने बड.े पैमाने पर उनकी संपत्ति जब्त की है। चुनावों में भी उनपर धन बल का जमकर इस्तेमाल करने के कथित आरोप लगते रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में एनोस खूंटी से लड़े थे और भाजपा के दिग्गज कड़िया मुंडा को सीधी टक्कर दी थी। इन हालात मे एनोस एक्का की राजनीति भी अर्श से फर्श पर जाती रही। अब एनोस एक्का नए सिरे से पैर जमाना चाहते हैं। विधानसभा चुनाव में देखा जा सकता है कि वे कितने प्रभावी होकर उभर रहे हैं।

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