उद्योग 4.0 और डिजिटलीकरण को वित्तीय लाभ के रूप में फलीभूत होना नितांत आवश्यक है

रांची: आरडीसीआईएस, सेल के सभागार में गुरूवार को आयोजित ऑटोमेशन एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एटीजम-19, के 6वें अंतराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में उद्योग के प्रमुख विशेषज्ञों ने उद्योग 4.0 और डिजिटलीकरण को एक तकनीक से अधिक मानसिकता के रूप में करार दिया। इसलिए इसका अधिकतम लाभ लेने के लिए मूल्य श्रृंखला में कर्मचारियों, उपयोगकर्ताओं, ग्राहकों, आपूर्तिकर्ताओं और सभी हितधारकों के एकीकृत डिजिटलीकरण से ही हम भारत के स्टील उद्योग को विश्व में प्रतिस्पर्धी बना सकता हैं। 90 के दशक में अपनी जापान यात्रा के दौरान इस तरह के नवोन्मेष को याद करते हुए एएन झा सदस्य 15वें वित्त आयोग और गुरूवार के सत्र के मुख्य अतिथि ने टोयोटा के कैजेन तरीकों से आज के डिजिटलीकरण की तुलना करते हुए कहा इसने टोयोटा को ऑटोमोबाइल जगत में विशिष्टता प्रदान की थी, जो अभी तक विद्यमान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार 30 करोड़ से अधिक लोगों के सफल वित्तीय समावेशन के लिए जनधन, आधार, मोबाइल ’जेएएम’ के माध्यम से डिजिटलीकरण भी किया गया और ऐसे डिजिटल ड्राइव के द्वारा एलपीजी उज्जवला, सबों के लिए बिजली कनेक्शन और आयुष्मान भारत में मदद मिली। मनरेगा भुगतान में 15000 करोड़ रूपए सीधे मजदूरों के खाते में गए और बिचौलियों का हुक्का पानी बंद हुआ। मुख्य संबोधन जयंत बनर्जी ग्रुप सीआईओ, टाटा स्टील द्वारा दिया गया था। जहां उन्होंने परिणाम उन्मुख सोच के लिए जोर दिया। अपनी प्रस्तुति में उन्होंने कई टाटा स्टील के कई नवोन्मेषी तकनीकों से दर्शकों को अवगत कराया। जिसके द्वारा इस्पात निर्माण में आज सुरक्षा बड़ी है और उत्पादकता, गुणवत्ता, उर्जा दक्षता आदि में उल्लेखनीय सुधार किया है। उद्योग 4.0 और डिजिटलीकरण को वित्तीय लाभ के रूप में फलीभूत होना नितांत आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आईटी ढांचे, साइबर सुरक्षा, वितरित क्लाउड को शामिल करते हुए एक उचित रूपरेखा तैयार की जानी चाहिए। बर्नहार्ड स्टीनकेन एसएमएस डिजिटल जर्मनी के सीईओ ने अपने संबोधन में उद्योग 4.0 और डिजिटलीकरण के महत्व को रेखांकित किया और इसका लाभ उठाकर हमें वैश्विक स्टील उद्योग की ज्वलंत समस्याओं का सामना करना चाहिए। जैसे अत्याधिक उत्पादन, कीमतों का उतार-चढ़ाव, पर्यावरणीय चुनौतियों आदि। आरएच जुनेजा निदेशक वित्त मेकॉन ने बताया कि हम पहले से ही संकेतों को देख रहे हैं कि भारतीय इस्पात उद्योग विश्वस्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के अपने निरंतर प्रयास में स्वचालन एवं सूचना प्रौद्योगिकी का लाभ संपूर्ण रूप से भुनाने में पीछे है। इससे उर्जा की बचत, कम लागत में उत्पादन से निवेश ऋण वापसी की अवधि काफी कम हो जाती है। काजल दास ईडी सीईटी ने बताया कि पूर्वी भारत भारतीय इस्पात उद्योग का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय इस्पात उद्योग गहन प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है और उद्योग 4.0 को अपनाने से व्यापार संचालन में दक्षता बढ़ेगी, जिससे सुरक्षा और उत्पादकता बढ़ेगी। उन्होंने सभा को यह भी बताया कि सेल में जल्द से जल्द ऑड इंडस्ट्री 4.0 पर लागू किया गया जाएगा और यह सम्मेलन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सेल में इस परिवर्तन को आगे बढ़ाने के लिए आरडीसीआईएस और सीईटी सेल को तैयार किया गया है। अजय अरोड़ा ईडी आरडीसीआईएस ने सभा को सूचित किया कि सम्मेलन की भागीदारी में वैश्विक इस्पात उद्योग के 45 से अधिक संगठनों के लगभग 300 प्रतिनिधि शामिल है। उन्होंने अपने विचार साझा किए कि सम्मेलन ने इस्पात उद्योग में महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उद्योग 4.0 के कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एक मंच और एक अवसर प्रदान किया। उन्होंने ऑटोमेशन और आईटी समुदाय से आग्रह किया कि हम बिग डेटा से सार्थक जानकारी निकाले, क्योंकि यह 2030 तक भारत के 300 एमटी लक्ष्य के लिए उत्प्रेरक होगा। सीएसआई के सचिव नीलेश सिन्हा ने सभी गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया और सम्मेलन के विषय पर एक संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी ने विनिर्माण प्रक्रिया के समर्थन में अपनी भूमिका को बदल दिया है। यह सेमिनार जगदीश अरोड़ा मुख्य महाप्रबंधक सीईटी, संजय परीदा मुख्य महाप्रबंधक आरडीसीआईएस और निलेश सिन्हा के अथक प्रयासों से आयोजित किया गया।

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