कड़ी धूप जलते पाँव, पेड़ होते तो मिलती छाँव विषय पर कार्यशाला आयोजित


पटना :- शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन के तत्त्वावधान में ‘‘कड़ी धूप जलते पाँव, पेड़ होते तो मिलती छाँव’’ विषयक एक दिवसीय कार्यशाला ‘‘बापू सभागार’’ गाँधी मैदान, पटना में आयोजित की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरेण्य गुरूभ्राता श्री हरीन्द्रानन्द जी ने कहा वन की महत्ता से हम सभी परिचित हैं। वृक्ष प्रकृति की सुंदरता को बढ़ाते हैं। ये इंसानों के लिए प्रकृति का सबसे महत्वपूर्ण भेंट है। इनका हर एक हिस्सा किसी न किसी रूप में उपयोगी होता हैं। वृक्ष हमें सांस लेने के लिए ऑक्सीजन, खाने के लिए फल, कड़ी धूप में छाया, पक्षियों को आश्रय, जानवरों को खाना देते है। उनके औषधीय गुणों की वजह से उनका उपयोग औषधि बनाने में होता है। पेड़ों की लकड़ी का उपयोग फर्नीचर,कागज,हथियार बनाने में किया जाता है। पेड़ वातावरण को ठंडा रखने में मदत करते हैं। पर्यावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को कम करके पेड़ वैश्विक तापमान को कम करने में मदत करते हैं। पेड़ों की वजह से हवा शुद्ध और ताजी बनती है। पेड़ों से बारिश की मात्रा में वृद्धि होती है। इस तरह वृक्ष बहु-उपयोगी होकर पर्यावरण और हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।

कार्यशाला का शुभारंभ राष्ट्रगान से हुआ। नालन्दा के विभिन्न हिस्सों से आये हुए लोगों का स्वागत कुँवर ब्रजेश सिंह ने किया। शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन के मुख्य सलाहकार अर्चित आनन्द ने कहा कि हमें वृक्षों को लगाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस वर्ष दीदी नीलम आनन्द जी के 67वीं जन्म दिवस के अवसर पर 21 जुलाई से 27 जुलाई तक वृक्षारोपण सप्ताह के रूप में शिव शिष्य हरीन्द्राननद फाउंडेशन, राँची के द्वारा मनाया गया और इस दौरान हमलोगांे ने बीस लाख पौधे पूरे देश में लगाया है और निरंतर इस दिशा में हम काम कर रहे हैं। जल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जल ही जीवन है। जल की एक-एक बुंद में जीवन है। जल को हम बना नहीं सकते किन्तु बचा तो सकते हैं। उन्होंने वर्ष 2030 तक देश की 40 प्रतिशत आबादी को पीने का पानी उपलब्ध नहीं होगा। आज तेजी से जल का स्तर नीचे जा रहा है जिसका एक मात्र कारण पेड़ों का कटना है। वर्ष 2020 तक देश के 21 अहम शहरों में भूगर्भ जल खत्म हो जायेगा। लोगों द्वारा बरसात के पानी को इकट्ठा करना आरंभ करना चाहिए। जल के उचित रख-रखाव और बरसात के पानी को इकट्ठा करने के लिए बड़े-बड़े तालाबों को बनाना चाहिए। जल संरक्षण के लिए युवा छात्रों को अधिक जागरूक होने की जरूरत है और साथ में इस मुद्दे की समस्या और समाधान पर एकाग्र होने की जरूरत है।

शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन की अध्यक्षा बरखा सिन्हा ने कहा कि हमारे गुरू शिव प्रकृति का अयण करते हैं। वे प्रकृति के पालक है, संरक्षक भी हैं। जल हमें और दूसरे प्राणियों को पृथ्वी पर जीवन प्रदान करता है। जल भगवान शिव का एक सुंदर उपहार है जो उन्होंने हमें दिया है। पृथ्वी पर जीवन को जारी रखना बहुत जरूरी है। पानी के बिना किसी भी ग्रह पर जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। पृथ्वी एकमात्र ऐसा ग्रह है जहाँ पर आज तक जीवन और पानी दोनों विद्यमान हैं।
प्रोफेसर रामेश्वर मंडल ने कहा कि शिव की शिष्यता से मन निर्मल किया जा सकता है। डॉक्टर अमित कुमार ने बताया कि मानव-जीवन प्रकृति का अभिन्न अंग हैं, इसलिए बढ़ते प्राकृतिक असंतुलन ने इंसान के जीवन को भी असंतुलित कर दिया है। फलस्वरूप आज का बिगड़ा पर्यावरण मनुष्य के स्वास्थ्य को बहुत ज्यादा प्रभावित कर रहा है। दूसरी ओर मिडिया प्रभारी अनुनीता ने कहा कि वृक्ष आदिकाल से ही मनुष्य के हितैषी रहे हैं। वृक्ष हमसे कुछ न लेते हुए भी हमें बहुत कुछ देते हैं जो एक सच्चा मित्र ही कर सकता है।

कार्यशाला में नालन्दा जिले से लगभग पाँच हजार लोग आये थे। आगंतुकों ने भी अपने विचार रखे कि किस तरह से वृक्षों का संरक्षण किया जाय ताकि प्रदूषण से लड़ा जा सके और हम स्वच्छ हवा में साँसे ले सकें।

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