अध्यात्म का जन्म ही प्रकृति की गोद में हुआ है :हरीन्द्रानंद जी

पटना :- वैश्विक शिव शिष्य परिवार के तत्त्वावधान में ‘‘कड़ी धूप जलते पाँव, पेड़ होते तो मिलती छाँव’’ विषयक एक दिवसीय कार्यशाला ‘‘बापू सभागार’’ गाँधी मैदान, पटना में आयोजित की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरेण्य गुरूभ्राता श्री हरीन्द्रानन्द जी ने कहा कि मानव जब प्रकृति के साथ एकाकार करता है तो बनती है बौद्धिकता और जन्म लेती है आध्यात्मिकता। भारतीय अध्यात्म का जन्म ही प्रकृति की गोद में हुआ है। पेड़ों और जंगलों को काटना तो हमारा समाज अपना शगल समझता है। पेड़ों को काटने का परिणाम क्या हो सकता है यह बताने की जरूरत नहीं। सड़क, मकान और होटलों को बनाने की दिशा में हम पेड़ काटते गए। एक तरफ छत तो बना रहें हैं पर ज़मीं काट रहे हैं। जब पेड़ ही नहीं रहेंगे तो ज़मीन कैसे तैयार होगी ? वर्तमान परिवेश में मानव अपनी जरूरतों के लिये पर्यावरण के स्थापित मानकों के साथ छेड़छाड़ कर रहा है वहीं मानवीय चेतना अपनी बौद्धिकता का स्तर भी खोती जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारे गुरू शिव स्वयं प्रकृतिपालक हैं, स्रष्टा हैं इस दुनियां के। पर्यावरण की रक्षा का ज्ञान उनका धार्मिक स्वरूप हमें देता है। एक दिवसीय संगोष्ठी में वेद उपनिषद् से लेकर प्रकृति के कई रूपों की व्याख्या की गई।

कार्यशाला का शुभारंभ राष्ट्रगान से हुआ। सीवान के विभिन्न हिस्सों से आये हुए लोगों का स्वागत कुँवर ब्रजेश सिंह ने किया। वैश्विक शिव शिष्य परिवार के मुख्य सलाहकार अर्चित आनन्द ने कहा कि प्रकृति के संरक्षण और संतुलन को न्यास का अति महत्वपूर्ण लक्ष्य बताया। पर्यावरण संतुलन पर केंद्रित इस कार्यक्रम में एक ओर जहां भगवान शिव के गुरू स्वरूप पर प्रकाश डाला गया वहीं शिव की बनाई हुई प्रकृति और उसके संरक्षण पर व्यापक बातचीत हुई। जल, जंगल और पेड़ यानि हमारा जीवन। पानी के बिना सृष्टि की सोच ही व्यर्थ है। मानव हो या जीव जंतु या फिर प्रकृति, जल ही जीवन है। पेड़ न हों तो हमारी साँसे दूभर हैं। विज्ञान कहता है कि एक स्वस्थ आदमी के लिए पेड़ों की ज़रूरत है ताकि वह साँस ले सके। वहीं प्रति स्वस्थ व्यक्ति को बीस लीटर पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे आँकड़े हमारे लिए किसी दिवा-स्वप्न की तरह हैं। इसकी प्राप्ति तभी संभव है जब हम-आप मिलकर समेकित प्रयास करेंगे।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के हिसाब से भारत इन पारामिटर में काफी पीछे है। अभी हमें लंबी दूरी तय करनी है।वैश्विक शिव शिष्य परिवार के अध्यक्ष प्रोफेसर रामेश्वर मंडल ने कहा कि शिव की शिष्यता से मन निर्मल किया जा सकता है। शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन की अध्यक्षा बरखा सिन्हा ने कहा कि हमारे गुरू शिव प्रकृति का अयण करते हैं। वे प्रकृति के पालक है, संरक्षक भी हैं। डॉक्टर अमित कुमार ने बताया कि मानव-जीवन प्रकृति का अभिन्न अंग हैं, इसलिए बढ़ते प्राकृतिक असंतुलन ने इंसान के जीवन को भी असंतुलित कर दिया है। फलस्वरूप आज का बिगड़ा पर्यावरण मनुष्य के स्वास्थ्य को बहुत ज्यादा प्रभावित कर रहा है। दूसरी ओर वैश्विक शिव शिष्य परिवार की उपाध्यक्षा अनुनीता ने कहा कि वृक्ष आदिकाल से ही मनुष्य के हितैषी रहे हैं। वृक्ष हमसे कुछ न लेते हुए भी हमें बहुत कुछ देते हैं जो एक सच्चा मित्र ही कर सकता है।

कार्यशाला में सीवान जिले से लगभग पाँच हजार लोग आये थे। आगंतुकों ने भी अपने विचार रखे कि किस तरह से वृक्षों का संरक्षण किया जाय ताकि प्रदूषण से लड़ा जा सके और हम स्वच्छ हवा में साँसे ले सकें।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.