राजमहल विधायक के खिलाफ साहेबगंज जिला विकास समिति ने खोला मोर्चा

रांची: अपनी ही पार्टी भाजपा के अंदर कई परेशानी से पहले से दो-चार साहेबगंज के विधायक अनंत ओझा के लिए सरकार का एक फैसला गले की हड्डी बनता जा रहा है। विधायक सरकार के फैसले से भले ही खुश हैं, लेकिन उनके ही क्षेत्र के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार की ओर से किए गए खासमहल फ्री-होल्ड करने की घोषणा राहत के बजाए विधायक के लिए परेशानी का सबब बन गया है। यदि समय रहते रघुवर सरकार खासकर साहेबगंज के मुद्दे पर यह नर्णय नहीं बदलती है तो निश्चितरूप से कहा जा सकता है कि राजमहल सीट भाजपा के लिए जीतना टेढ़ी खीर होने वाली है। साहेबगंज की जनता इसे कतई बर्दाश्त नहीं करने वाली है। सेवानिवृत अपर समाहर्ता बीरेंद्र झा ने खासमहल को लेकर काफी रिसर्च भी किया है और विभिन्न सरकारी मंचों पर साबित भी किया है कि प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार साहेबगंज की जमीन खासमहल नहीं है। लगभग 30 वर्षों से खासमहल को लेकर स्थानीय जनता संघर्ष करती रही है। कई सरकारें आईं और दर्जनों बार उसके राजस्व मंत्री को दस्तावेज तथ्य के साथ प्रस्तुत कर समझाया जा चुका है कि साहेबगंज की जमीन खासमहल नहीं है। मौके पर तत्कालीन राजस्व मंत्री ने स्वीकार भी किया था, लेकिन साहेबगंज की जनता के पक्ष में निर्णय को लेकर सभी सरकारें इसे टालती रही और साहेबगंज की जनता को बेवकूफ बनाती रही। इस बार जनता सरकार से आरपार की लड़ाई लड़ने का ऐलान कर चुकी है। साहेबगंज खासमहल मुद्दे को लेकर जिला विकास समिति की तरफ से हाल ही में प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन कर इसके अध्यक्ष अरविंद कुमार गुप्ता ने कहा कि पिछले दिनों स्थानीय विधायक अनंत कुमार ओझा ने पूरे साहेबगंज में माइक से काला कानून खासमहाल के समाप्त हो जाने का ऐलान करवाया था, लेकिन उन्होंने काला कानून खासमहाल समाप्त नहीं करवाया, बल्कि उल्टे साहेबगंज में काला कानून खासमहाल को लागू करवाने का काम किया है। अगर विधायक ने काला कानून खासमहाल समाप्त कराया होता तो साहेबगंज की जनता को जमीन का लीज कराने के लिए नहीं कहा जाता। सरकार ने जो नोटिफिकेशन जारी किया है उसके अनुसार अब साहेबगंज की जनता को आवासीय जमीन के वर्तमान बाजार मूल्य का 15 प्रतिशत एवं व्यावसायिक जमीन के बाजार मूल्य की 30 प्रतिशत राशि भुगतान कर जमीन का लीज कराना होगा। उसपर भी सरकार को अगर महसूस होगा कि लीज किया गया जमीन सरकारी उपभोग के लिए जरूरी नहीं है, तभी जमीन को फ्री-होल्ड किया जाएगा अन्यथा नहीं। झारखंड सरकार के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग से जो संकल्प पत्र जारी किया गया है उसमें यह भी है कि अगर कोई गरीब 3 वर्ष के अंदर लीज कराने के लिए सरकार को आवेदन समर्पित नहीं करता है तो कानूनी प्रावधान कड़ाई से लागू किए जाएंगे। इसका मतलब यह हुआ कि 3 वर्ष के अंदर जो सरकार को आवेदन समर्पित नहीं करेगा उसे सरकार जमीन से बेदखल कर सकती है। इस विषय पर विकास समिति के अध्यक्ष ने कहा कि पूरे झारखंड के संदर्भ में उक्त नोटिफिकेशन आम जनता के लिए जनहित में है, लेकिन साहेबगंज के संदर्भ में सरकार का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है। समिति की ओर से कहा गया कि जब पूरे झारखंड से खासमहाल को समाप्त करने का निर्णय लिया जा रहा था तो उस समय राजमहल विधायक को सरकार के समक्ष साहेबगंज की जमीन के खासमहाल नहीं होने की बात रखनी चाहिए थी, तो हो सकता था कि सरकार साहेबगंज की जमीन को बिना लीज कराए ही फ्री-होल्ड कर सकती थी। समिति के सचिव विनोद कुमार यादव ने कहा कि अंग्रेजों ने यह काला कानून नहीं लगाया है। उस समय तो जमीन की रजिस्ट्री होती ही थी। 1980 के बाद जमीन की रजिस्ट्री होना बंद कर दिया गया। वहीं 2000 के बाद जमीन की मालगुजारी का पर्चा कटना बंद हुआ। समिति के अध्यक्ष अरविंद कुमार गुप्ता ने कहा कि साहेबगंज की 99 फीसद जनता ने कभी भी जमीन का लीज नहीं कराया। इसलिए जिला विकास समिति सरकार से साहेबगंज की जमीन को बिना लीज कराए ही फ्री-होल्ड किए जाने की मांग करती है, अन्यथा साहेबगंज की जनता को लेकर जोरदार आंदोलन आरंभ कर दिया जाएगा। जिला विकास समिति की बैठक में मुख्यमंत्री से मिलने का निर्णय लिया गया। जिला विकास समिति के अध्यक्ष अरविंद कुमार गुप्ता ने कहा कि साहेबगंज की जमीन कभी खासमहाल रही ही नहीं है तो फिर लीज कराने का सवाल ही नहीं उठता है। बैठक में सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री को इस मुद्दे से अवगत कराने का निर्णय लिया गया। अरविंद गुप्ता ने बताया कि पूरे झारखंड की खासमहाल की जमीन की प्रकृति साहेबगंज की जमीन की प्रकृति से अलग है, इसकी जानकारी देने के लिए मुख्यमंत्री रघुवर दास से समिति का एक शिष्टमंडल मिलेगा, साथ ही उन्हें बताएगा कि साहेबगंज की जमीन खासमहाल की जमीन है ही नहीं। साथ ही उनसे आग्रह करेगा कि साहेबगंज की जमीन को बिना लीज कराए सीधे रजिस्ट्री कराने का आदेश दिया जाए। इसके लिए एक माह का समय दिया जाएगा। अगर एक माह के अंदर इसपर उचित निर्णय नहीं किया गया तो समिति साहेबगंज की जनता को लेकर जोरदार आंदोलन आरंभ कर देगी। हालात यह है कि भाजपा सरकार से राहत की उम्मीद लगाए जनता को इस फैसले से ठगी का शिकार होना पड़ा है, आगे किसी भी हाल में स्थानीय जनता किसी के बहकावे में नहीं आनेवाली है। त्योहार के सीजन के बीतते ही निश्चित रूप से जोरदार आंदोलन का बिगुल बजने ही वाला है और इसका खामियाजा आनेवाले दिनों में भाजपा को ही भुगतना पड़ेगा।

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