किशनगंज में मछली मारने के दौरान मिला दुर्लभ प्रजाति का पैंगोलिन 

किशनगंज:- मछली मारते समय दुर्लभ प्रजाति का विलुप्तप्राय पैंगोलिन को पकड़ा गया। जिले के दिघलबैंक प्रखंड के बैरबन्ना गांव में पैंगोलिन मिलने की सूचना ग्रामीणों द्वारा दिघलबैंक थाने को दी गई।सूचना पाकर पहुँची पुलिस ने पैंगोलिन को अपने संरक्षण में लेकर बुधवार वन विभाग के कर्मियों को सौंप दिया।

वन विभाग के पदाधिकारी उमानाथ दूबे ने बताया कि पैंगोलिन सुरक्षित है। इसके बारे में विभाग के वरीय पदाधिकारियों को जानकारी दे दी गयी है। उन्होंने ने संभावना जताई कि दुर्लभ प्रजाति के इस जीव को पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान में रखा जा सकता है।

बताते चलें कि भारत में पाए जाने वाले पैंगोलिन दुर्लभ प्रजातियों में से एक जीव है। यह जीव समूह में रहना पसंद नहीं करता, अक्सर अकेला दिखनेवाला जीव है यह। पैंगोलिन के मांस को दुर्लभ और गुणकारी माना गया है जिसके चलते लोग इसका शिकार करते रहे हैं। यही कारण है कि भारत में यह जीव आज विलुप्ति के कगार पर है। यह पैंगोलिन भारत नेपाल सीमा पर स्थित बैरबन्ना गांव में मिला है। आशंका जताई जा रही है कि यह पैंगोलिन नेपाल के जंगलों से यहां आया होगा। इससे पहले 2016 में भी दिघलबैंक प्रखंड के सीमावर्ती गांव मोहमारी धनतोला के पास भी एक बार पैंगोलिन को पकड़ा गया था।

स्वभाव से शर्मिला और खूबसूरत दिखने वाला यह जीव चींटियों को अपना आहार बनाता है।इसलिए यह चोटियों के बाम्बी के इर्द गिर्द मंडराता रहता है। खतरे का आभास होने पर पेंगोलिन खुद को अपने खोल में समेटकर फुटबाल की तरह गोल हो जाता है। इसके बाद वह यह भी देख ही नहीं पाता कि उस पर कोई हमला भी कर रहा है या नहीं नतीजा शिकारी आसानी से इसे पकड़ लेते है।इसका मांस चमड़ा बेशकीमती होने के कारण इसकी तश्करी भी होती है।

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