भाजपा को झटका, प्रवीण प्रभाकर ने पार्टी छोड़ी, एनपीपी के टिकट पर नाला से लड़ेंगे चुनाव

रांची: झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा के अंदर उपजे असंतोष के बीच प्रवीण प्रभाकर ने अपने प्रदेश प्रवक्ता के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही वे नेशनल पीपुल्स पार्टी ’एनपीपी’ में शामिल हो गए। इसी पार्टी के टिकट से वे नाला विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे। मंगलवार को प्रवीण प्रभाकर अपना पर्चा दाखिल करेंगे। नाला में 20 दिसंबर को चुनाव है। सोमवार को मेघालय के मुख्यमंत्री व एनपीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सीके संगमा और सांसद अगाथा संगमा समेत अन्य नेताओं ने नई दिल्ली के कांस्टीटूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रवीण प्रभाकर को सदस्यता दिलाई। इस मौके पर मेघालय के गृहमंत्री जेम्स संगमा और पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष राज कुमार पोद्दार समेत कई नेता उपस्थित थे। झारखंड में हो रहे विधानसभा चुनाव में पार्टी में टिकट वितरण की व्यवस्था और फैसले से वे संतुष्ट नहीं थे। नाला विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने दावेदारी की थी और चुनाव की तैयारी में वर्षों से जुटे थे। इससे पहले आजसू पार्टी के टिकट से वे नाला से लड़ चुके हैं। इसबार भाजपा ने नाला में पूर्व विधायक सत्यानंद झा बाटुल को टिकट दिया है। नाला से ही भाजपा के नेता माधवचंद्र महतो पार्टी छोड़कर आजसू में शामिल हो गए हैं। वे आजसू के टिकट से चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले भाजपा में शामिल होने के साथ अपने कामकाज के बूते प्रवीण प्रभाकर ने संगठन में प्रमुख जगह बनाई। लोकसभा चुनाव के वक्त वे पूरे संथाल परगना में भाजपा की मुहिम में शामिल रहे। संथाल परगना में क्षेत्रीय दलों की पकड़ का नब्ज उन्हें पहले से पता था, लिहाजा भाजपा के लिए कई फ्रंट पर आगे बढ़कर काम करते रहे। इधर, प्रदेश प्रवक्ता की भूमिका भी वे बखूबी संभालते रहे। भाजपा छोड़ने के सवाल पर प्रवीण प्रभाकर ने कहा हमें भाजपा से कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, लेकिन झारखंड में पार्टी को आत्मचिंतन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा भाजपा में नरेंद्र मोदी और अमित शाह के मार्गदर्शन में मुझे काफी कुछ सीखने का अवसर मिला है। उनके नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है, लेकिन झारखंड की जनता की आकांक्षाओं पर लगातार आघात जारी है। चुनाव में सतही जानकारी और तथ्यों की अनदेखी की गई। साथ ही व्यक्तिवाद और एकतरफा निर्णय हावी हो रहा है। मैंने झारखंड आंदोलन में बहुत समय दिया है। एक बेहतर झारखंड के निर्माण के लिए संघर्ष जारी रहेगा। प्रवीण ने कहा कि नाला को हमने कर्मभूमि बनाई। भाजपा के फैसले से समर्थक मायूस थे। लिहाजा सबके साथ रायशुमारी की और नई राह पर चलने के लिए आगे बढ़े। संघर्ष और मूल्यों का वे हमेशा सम्मान करते हैं। देखा जाए आगे क्या होता है। गौरतलब है कि एनपीपी को हाल में ही चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी के रूप में मान्यता प्रदान की है। एनपीपी समेत पूरे देश में मात्र आठ पार्टियों को राष्ट्रीय राजनीतिक दल की मान्यता प्राप्त है। प्रवीण प्रभाकर के पार्टी में शामिल होने पर मुख्यमंत्री सीके संगमा ने कहा प्रवीण प्रभाकर झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता व भाजपा प्रवक्ता रहे हैं। उनके एनपीपी में शामिल होने से झारखंड समेत भारत के अन्य राज्यों में पार्टी का जनाधार बढ़ेगा और हमसब मिलकर संगमा साहब के सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर पाएंगे।

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