कैबिनेट की पहली बैठक में हेमंत सरकार का बड़ा फेसला, पत्थलगड़ी मामले में दर्ज सभी एफआईआर होंगी वापस

रांची: झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में बनी सरकार ने पहले दिन ही सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन की कोशिश और पत्थगड़ी आंदोलन के दौरान आमलोगों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने का अहम फैसला लिया है। शपथ ग्रहण समारोह के बाद कैबिनेट की बैठक में इस फैसले को मंजूरी दी गई। कैबिनेट की बैठक में सरकार के तीन नए मंत्री रामेश्वर उरांव, आलमगीर आलम और सत्यानंद भोक्ता शामिल थे। झारखंड के नए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शपथ लेने के साथ ही एक्शन मोड में आ गए हैं। कैबिनेट की बैठक में 3 महत्वपूर्ण मुद्दों पर फैसला लिया गया। विधायकों को शपथ दिलाने के लिए प्रोटेम स्पीकर के रूप में स्टीफन मरांडी का चयन हुआ है, वहीं 6 जनवरी से 8 जनवरी तक झारखंड विधानसभा का सत्र चलेगा। पहले दिन सभी नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी। 7 जनवरी को स्पीकर का निर्वाचन होगा और 8 जनवरी को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी। हेमंत कैबिनेट ने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम ’सीएनटी’ और पत्थलगड़ी मामले में दर्ज एफआईआर वापस लेने का निर्देश दिया है। साथ ही खाली पड़े सरकारी पदों को भरने का भी निर्देश दिया है। नए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने को कहा गया है। ठंड को लेकर सभी उपायुक्त तथा निगम के आयुक्त से जल्द गरीबों के बीच कंबल, टोपी और सार्वजनिक स्थलों पर अलाव की व्यवस्था करने को कहा गया है। झारखंड के प्रतीक चिन्ह को नए स्वरूप देने का भी निर्देश दिया गया है। अनुबंधकर्मियों और छात्रवृत्ति के लंबित भुगतान को जल्द देने निर्गत करने का आदेश दिया गया है। गौरतलब है कि सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन के दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों में आंदोलन हुए थे, जबकि पत्थलगड़ी को लेकर खूंटी समेत कोल्हान के कई हिस्सों में आंदोलन हुआ था। पत्थगलड़ी को लेकर खूंटी में ही सैकड़ों लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज है और दर्जनों लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इनमें कई गांवों के ग्राम प्रधान भी शामिल हैं। दर्ज मुकदमे के बाद लोगों की गिरफ्तारी के लिए दर्जनों ग्रामीणों के घरों की कुर्की की गई है, जबकि कई लोग पुलिस की डर से गांव छोड़कर भाग गए हैं। पिछले साल आंदोलन के दौरान हालात तब बिगड़ गए थे जब लोगों ने भाजपा के पूर्व सांसद कड़िया मुंडा के घर से तीन हाउस गार्ड का अगवा कर लिया था। तब पुलिस ने भीड़ को काबू में करने के लिए फायरिंग की थी। पत्थलगड़ी आंदोलन के दौरान ही सोशल मीडिया पर भड़काउ पोस्ट करने के आरोप में बीस सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक के खिलाफ भी रघुवर दास की सरकार में देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया था। कैबिनट ने एक अन्य फैसले के तहत महिलाओं तथा अवयस्कों के विरुद्ध हो रहे यौन उत्पीड़न एवं अन्य अपराधों को लेकर प्रत्येक जिला में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करते हुए न्यायिक पदाधिकारियों के आवश्यक पदों के सृजन करने का निर्णय लिया है।

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