झारखंड भाजपा में अबतक विधायक दल के नेता का नहीं हो पाया है चुनाव, चुनाव में पराजय के बाद कार्यालय में पसरा है सन्नाटा

रांची: अबकी बार 65 पार, नारा के साथ विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत झोंकने वाली झारखंड भाजपा में फिलहाल हलचल गुम है। चुनाव के नतीजे आए दस दिन हुए, पर प्रदेश या केंद्रीय स्तर पर कोई बड़ी बैठक नही नहीं हो सकी है। जाहिर है चुनाव में करारी हार के बाद सबकी नजर इस ओर लगी है कि आगे भाजपा की रणनीति क्या होगी। साथ ही नजरें टिकी है कि भाजपा में विधायक दल का नेता कौन होगा और कौन होगा नया प्रदेश अध्यक्ष। दरअसल 23 दिसंबर को नतीजे आने के ठीक दो दिन बाद 25 दिसंबर को लक्ष्मण गिलुआ ने प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि बताया जा रहा है उनका इस्तीफा फिलहाल स्वीकार नहीं हुआ है। कमेटी काम कर रही है। नया प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए पार्टी में आधे दर्जन से अधिक नेताओं के नाम उछल रहे हैं। लॉबिंग भी जारी है, लेकिन विधानसभा चुनाव के नतीजे को देखते हुए अहम जिम्मेदारी देने से पहले शीर्ष नेतृत्व हर पहलु और समीकरण को परख लेना चाहता है। वैसे चुनाव नतीजे आने के बाद प्रारंभिक रिपोर्ट नेतृत्व तक पहुंच गई है। संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने कई शीर्ष नेताओं को मौजूदा स्थिति की जानकारी दी है। इस बीच पार्टी में रघुवर दास की भूमिका क्या होगी इसे भी देखा जाना है। रघुवर दास पहले प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। बीते 28 दिसबंर को रघुवर दास ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा से दिल्ली में मुलाकात की थी। हालांकि मुलाकात और बातचीत का ब्योरा बाहर नहीं आया है। संकेत इसके भी हैं कि हार का ठीकरा रघुवर दास पर ज्यादा फूट सकता है। अंदरखाने इसकी भी चर्चा है कि इसबार बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी। दरअसल नेतृत्व झारखंड की हार पर बेहद गंभीर है। नतीजे आने के दस दिनों बाद तक पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों की इकट्ठे और आधिकारिक तौर पर बैठक नहीं हो सकी है। इस बीच छह से आठ जनवरी तक विधानसभा का सत्र आहूत है। इसी सत्र में हेमंत सोरेन की सरकार विश्वासमत हासिल करेगी और सात जनवरी को ही विधानसभा अध्यक्ष की नियुक्ति होगी। इस बीच रघुवर दास इन बातों पर जोर देते रहे हैं कि उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया गया, लेकिन इतना कहने से वे बच नहीं सकते। जाहिर है कलतक जिस झारखंड को लेकर नेतृत्व गुमान में था उसे संभालने की चुनौती एकबारगी आन पड़ी है। अब झारखंड भाजपा का नेतृत्व कोई करे उसे संगठन को संभालने के साथ विपक्ष की मजबूत भूमिका में आने और झामुमो की ताकत को रोकने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा और ये काम बहुत आसान नहीं हैं। झारखंड विधानसभा चुनाव का परिणाम आने से एक सप्ताह से अधिक होने को है। इस बीच प्रदेश भाजपा ने पाने विधायक दल नेता का चुनाव नहीं कर पाया है। हाल तो यह हो गया है कि चुनाव मिली पराजय से उत्पन्न सदमे से अबतक प्रदेश के नाता उबर नहीं पाए हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ और पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास खुद चुनाव हार गए हैं। अब नेता का नेतृत्व कौन करेगा, यह फैसला नहीं हो पाया है। पार्टी ने इस बाबत अभी विधायक दल की बैठक तक नहीं बुलाई है। 6 जनवरी से पंचम विधानसभा का पहला सत्र प्रारंभ होगा, ऐसे में 5 जनवरी तक विधायक दल के नेता का चुनाव हो जाना चाहिए। इस बीच चक्रधरपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार जाने के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा इस्तीफा दे चुके हैं, तो प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह 26 दिसंबर से दिल्ली में हैं। प्रदेश कार्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ है। गाहे-बगाहे अगर कोई जीता हुआ विधायक प्रदेश कार्यालय पहुंचता भी है तो उसे सही सूचना नहीं मिल पा रही है। पार्टी की करारी हार के बावजूद प्रदेश स्तर पर समीक्षा बैठक की कहीं कोई सुगबुगाहट नहीं है। पार्टी के सभी जीते 25 विधायक अपने-अपने क्षेत्र में हैं। मिली जानकारी के अनुसार धर्मपाल सिंह के साथ भाजपा के आला नेताओं की दिल्ली में पार्टी विधायक दल के नेता और प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति पर मंथन हुआ है। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष समेत अन्य वरीय नेताओं के साथ धर्मपाल सिंह की दो दौर की बैठक भी हुई है। विधानसभा चुनाव प्रभारी रहे ओमप्रकाश माथुर ने भी अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय संगठन को सौंप दी है। विधायक दल की बैठक के लिए प्रदेश के नेताओं का केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश का इंतजार है। विधायक दल का नेता चुने जाने के लिए केंद्रीय स्तर पर किसी जिम्मेदार नेता को भी भेजा जाना है। पार्टी के वरिष्ठ विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा और सीपी सिंह का नाम विधायक दल के नेता के रूप में आगे है। दोनों के पास लंबा अनुभव है और भाजपा के पुराने चेहरे भी हैं। पार्टी के प्रदेश महामंत्री दीपक प्रकाश कहते हैं पार्टी में सन्नाटा नहीं है, गतिविधियां जारी हैं। नेतृत्व के निर्देश का इंतजार है। समय पर विधायक दल का नेता भी चुना जाएगा। साथ ही चुनाव के नतीजों को लेकर विचार मंथन किया जाएगा।

लक्ष्मण गिलुआ का इस्तीफा: लक्ष्मण गिलुआ चक्रधरपुर सीट पर विधानसभा चुनाव लड़े थे, झामुमो से हार गए। इससे पहले पार्टी ने उन्हें चाईबासा से लोकसभा का चुनाव लड़ाया था। तब वे कांग्रेस से चुनाव हार गए थे। भाजपा की करारी हार के बीच रघुवर दास को भी जमशेदपुर पूर्वी सीट पर हार का सामना करना पड़ा है। भाजपा में ही बगावत की राह पर उतरे सरयू राय ने रघुवर दास को हराया है। चुनाव के वक्त और नतीजे आने के बाद से सरयू राय रघुवर दास पर निशाना साधते रहे हैं। चुनाव में टिकट बंटवारे से उपजा अंसतोष अब सतही तौर पर भी छलकता दिखाई पड़ने लगा है। लक्ष्मण गिलुआ को रघुवर दास का बैकिंग सबसे ज्यादा था, लेकिन चुनाव में दोनों हारे। इससे भी संगठन में खामोशी है। भाजपा को सबसे ज्यादा झटका आदिवासी इलाकों में लगा है। अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित 28 में से सिर्फ दो सीटों पर भाजपा को जीत मिली है। 25 सीटों पर झामुमो-कांग्रेस और एक सीट पर झाविमो को जीत मिली है। चुनाव से पहले भाजपा ने आदिवासियों की 22 सीटें जीतने का लक्ष्य हासिल किया था। साथ ही भाजपा इसबार सिर्फ 25 सीटों पर चुनाव जीती है, जबकि सत्ता की बागडोर संभालने वाले झामुमो 30 सीटों पर चुनाव जीतकर सबसे बड़े दल के तौर पर उभरा है। हालांकि भाजपा को झामुमो से ज्यादा वोट मिले हैं। भाजपा को विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा 50 लाख 22 हजार हजार 374 वोट 33.4 प्रतिशत मिले हैं। 2014 के चुनाव में भाजपा ने 37 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा और आजसू ने 12 सीटों पर जीत हासिल कर तथा 83 लाख वोटों का रिकॉर्ड खड़ा कर विपक्ष के सकते में डाल रखा था। आगे भाजपा के सांसदों की भूमिका पर सवाल खड़े हो सकते हैं। कई संसदीय क्षेत्र में एक भी विधानसभा सीट पर भाजपा को जीत नहीं मिली है। चुनाव नतीजे के बाद सांसदों की नजर भी नेतृत्व पर है।

सत्ता बचाने में नाकाम: विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथ से सत्ता भी सरक गई और बड़ी हार का सामना करना पड़ा, जबकि लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही भाजपा ने विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी थी और चुनाव में पार्टी ने तमाम दिग्गजों को उतारा था। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओमप्रकाश माथुर चुनाव प्रभारी तथा बिहार सरकार में मंत्री भाजपा वरिष्ठ नेता नंदकिशोर यादव सह प्रभारी की कमान संभाल रहे थे। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी झारखंड में ही सबसे ज्यादा वक्त देते रहे। चुनाव के दौरान सदस्यता अभियान के प्रभारी कई दफा आए, भाजपा में सबसे बड़े और करिश्माई नेता नरेंद्र मोदी ने झारखंड में दस चुनावी रैलियां की। भाजपा के बांबिंग प्रचार से विपक्ष हैरान-परेशान रहा, जबकि चुनावी नतीजे ने भाजपा को झकझोर कर रख दिया है और झामुमो नेता हेमंत सोरेन सबसे बड़े बाजीगर बनकर उभरे हैं।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.