सीएए के खिलाफ जुलूस, मुख्यमंत्री ने वासेपुर धनबाद के 3 हजार लोगों से देशद्रोह की धारा हटाने का आदेश दिया

रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आदेश पर धनबाद के सिटी एसपी आर. रामकुमार ने धनबाद थाना के प्रभारी से वासेपुर के 3000 लोगों पर लगे देशद्रोह की धारा हटाने को कहा है। इसके साथ ही न्यायालय में शुद्धि पत्र समर्पित करने को कहा है। हालांकि इस केस में बाकी धाराएं लागू रहेंगी। उनमें कुछ धाराएं गैरजमानतीय भी हैं। सिटी एसपी ने थाना प्रभारी संतोष कुमार से इसी मामले में स्पष्टीकरण भी पूछा है कि किन परिस्थितियों में आईपीसी की धारा 124 लगाई गई। थाना प्रभारी से तीन दिनों में जवाब देने को कहा गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि कानून जनता को डराने एवं उनकी आवाज दबाने के लिए नहीं, बल्कि आम जनमानस में सुरक्षा का भाव उत्पन्न करने को होता है। गौतलब है कि सात जनवरी को वासेपुर धनबाद के लोगों ने सीएए एनआरसी के खिलाफ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करते हुए जुलूस निकाला था। यह जुलूस पूजा टॉकीज सिटी सेंटर से रंधीर वर्मा चौक तक निकला, जबकि जुलूस निकाले जाने के लिए प्रशासन ने कोई अनुमति नहीं दी थी। धनबाद के सीओ प्रशांत लायक ने इसी बात पर प्राथमिकी दर्ज करने के लिए थाना में आवेदन दिया था। सीओ के आवेदन के आलोक में सात नामजद लोगों के साथ 3000 अज्ञात पर धनबाद थाना ने आईपीसी की धारा 143, 145, 149, 186, 188, 290, 291, 336, 153ए, 153बी और 124ए के तहत मुकदमा दर्ज किया। धनबाद थाना में जिन सात लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है उनमें मो सैयद शहवाज, मो. साजिद उर्फ शाहिद, मो. हाजी आरिफ जमीर, मो. सद्दाम, अली अकबर, मो. नौशाद और मौलाना गुलाम नबी शामिल हैं। हालांकि बाकी धाराएं लागू रहेंगी। उनमें कुछ धाराएं गैरजमानतीय भी हैं। धनबाद के सिटी एसपी ने थाना प्रभारी को भेजे पत्र में कहा है इस मामले में धारा 124ए लगाने का कोई औचित्य प्रतीत नहीं हो रहा है। प्रतीत होता है कि आवेदन की गहराई में अवलोकन किए बिना ही कांड पंजीकृत किया गया, जो आपके स्वेच्छाचारिता एवं अयोग्य पुलिस अधिकारी होने का परिचायक है। इससे पहले बुधवार को एसएसपी किशोर कौशल ने सिटी एसपी आर. रामकुमार को केस के सुपरविजन का आदेश दिया। शाम तक रिपोर्ट आ गई। पाया गया कि जुलूस में ऐसा कुछ नहीं किया गया जिसे देशद्रोह के दायरे में माना जाए।

क्या है धारा 124ए:

अगर कोई भी व्यक्ति सरकार के विरोध में सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी गतिविधि को अंजाम देता है, सरकार विरोधी सामग्री लिखता या बोलता है, ऐसी सामग्री का समर्थन करता है, राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान करने के साथ संविधान को नीचा दिखाने की कोशिश करता है या फिर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर नफरत फैलाने या फिर असंतोष जाहिर करता है, तो वह देशद्रोह का आरोपी होगा। इस आरोप में आजीवन कारावास या तीन साल की सजा हो सकती है। यह एक गैरजमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा सुनवाई की जाती है।

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