छात्रों को बांटने की केन्द्र की नीति खतरनाक, सरकार उच्च शैक्षणिक संस्थानों के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों का दुरूपयोग कर रही है: सुबोधकांत सहाय

रांची: पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोधकांत सहाय ने कहा है कि देश के स्वाभाविक चरित्र के लिए छात्रों को बांटने की केंद्र की नीति खतरनाक है। सहाय ने यहां रविवार को कहा कि सांप्रदायिक सद्भाव, विकास, आपसी एकजुटता और बेरोजगारी-गरीबी से समग्र लड़ाई की सरकारी नीति को नुकसान पहुंचाने के बाद अब मोदी सरकार छात्र राजनीति पर भी प्रहार कर रही है। यह न केवल छात्रों या देश के लिए, बल्कि सभी के लिए नुकसानदेह है। उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत ही उन्होंने छात्र राजनीति से की और तब इसका चरित्र आंदोलनात्मक, जुझारू, लेकिन सदभावपूर्ण होता था। आपसी कटुता तथा ध्रुवीकरण का उसमें कोई स्थान नहीं था और आज जैसा वातावरण उन्होंने जीवनभर नहीं देखा। सहाय ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलपति अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते, लेकिन उन्हें यह भी समझना चाहिए कि सरकार उच्च शैक्षणिक संस्थानों के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों का दुरूपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि तीन दिनों की चुप्पी के बाद विश्वविद्यालय के कुलपति मीडिया से बात करते हैं, जबकि उनको उनके पद से हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय बीतने के साथ-साथ ऐसा लगता है कि संपूर्ण स्थिति पर सरकार या विश्वविद्यालय प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है। नकाबपोश अपराधियों की पहचान होने संबंधी दिल्ली पुलिस के खुलासे की चर्चा करते हुए सहाय ने कहा कि पुलिस का रवैया संदेह से भरा है, क्योंकि उसने घायल छात्रों को ही अपराधियों की सूची में शामिल कर लिया जो हास्यास्पद है।

दिल्ली पुलिस वास्तविक अपराधियों को नहीं पकड़ सकी: सुबोधकांत ने कहा कि जो दिल्ली पुलिस वास्तविक अपराधियों को नहीं पकड़ सकी, उसपर कोई कैसे भरोसा करे। वह भी उस स्थिति में जबकि स्वयं प्रधानमंत्री, गृहमंत्री के साथ ही शीर्ष सरकारी एजेंसियां भी आतंकवादी घटनाओं की आशंका संबंधी चेतावनी देती रहती है। उन्होंने कहा कि एक जमाना था जब दिल्ली पुलिस अपनी प्रोफेशनलिज्म के लिए पूरी दुनिया में पहचानी जाती थी, लेकिन अब तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे उसका भी राजनीतिकरण हो चुका है। सहाय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह एवं मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक से छात्रों की समस्याओं तथा संबंधित मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देने की अपील करते हुए कहा कि सरकार पूरी सहानुभूति के साथ इस मुद्दे को सुलझाए, साथ ही गरीबी, बेरोजगारी जैसी जमीनी समस्याओं पर अपना ध्यान केंद्रित करे।

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