झारखंड में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर दिल्ली में मगजमारी, तस्वीर साफ नहीं

रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कांग्रेस के नेताओं से बातचीत जारी है, लेकिन सबकुछ साफ नहीं हो सका है। मंगलवार को हेमंत रांची लौट गए। रविवार की शाम हेमंत सोरेन दिल्ली पहुंचे थे। सोमवार को सीएए और एनआरसी को लेकर सोनिया गांधी ने विपक्ष की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में हेमंत सोरेन भी शामिल थे। हालांकि इस बैठक में बहुजन समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेता शरीक नहीं हुए थे। हेमंत सोरेन ने 29 दिसंबर को झारखंड में सत्ता की बागडोर संभाली है। उनके साथ कांग्रेस के दो और राजद कोटा से एक मंत्री ने शपथ ली है। कांग्रेस से और तीन लोगों को मंत्री बनाए जाने की दावेदारी है। खबरों के मुताबिक विभागों को लेकर भी पेच फंसता जा रहा है। उधर, राजद सत्यानंद भोक्ता के लिए बड़ा विभाग चाहता है। कांग्रेस में मंत्री को लेकर अलग ही लॉबिंग जारी है। कांग्रेस के कई विधायक हेमंत सोरेन से भी तरफदारी करने की गुजारिश कर रहे हैं। हालांकि हेमंत इससे बचना चाहते हैं। उन्हें कांग्रेस नेतृत्व के फैसले का इंतजार है। हेमंत अपने ही दल झामुमो में नाम तय करने को लेकर अलग दबाव में हैं। इसबार मंत्री का चयन बहुत आसान नहीं माना जा रहा। उधर, कांग्रेस के कम से कम आधे दर्जन विधायक लगातार दिल्ली में कैंप कर रहे हैं। कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम भी दिल्ली में ही हैं। क्षेत्रीय और जातीय संतलुन को लेकर सबकुछ परखा जा रहा है। इस काम में झारखंड कांग्रेस के प्रभारी आरपीएन सिंह की अहम भूमिका होगी। राहुल गांधी भी इस मसले पर आरपीएन सिंह और आलमगीर आलम से मशविरा कर रहे हैं। इधर, कांग्रेस के मंत्री डा. रामेश्वर उरांव का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बातचीत चल रही है। जल्दी ही सबकुछ साफ हो जाएगा। कहीं कोई अड़चन नहीं है, लेकिन यूपीए खेमा के एक नेता ने कहा कि पेच इतने हैं कि रणनीतिकार पत्ते खोलने से परहेज कर रहे हैं। इरफान अंसारी की भी दावेदारी कायम है। कांग्रेस के लिए दिक्कत यह है कि संथाल परगना से ही आलमगीर आलम को मंत्री बनाया जा चुका है और वे भी अल्पसंख्यक वर्ग से हैं। कांग्रेस में इसबार चार महिलाएं चुनाव जीती हैं। इनमें से एक का मंत्री बनना तय है। हालांकि सभी पहली बार विधायक बनी हैं। इसलिए किसी एक का नाम तय करने में पार्टी को बहुत दिक्कत नहीं है। वैसे अंबा प्रसाद, ममता देवी, दीपिका सिंह पांडेय और पूर्णिमा नीरज सिंह चारों इस दौड़ में शामिल हैं। नेताओं के पास उनके तर्क हैं। इन सबके बीच दीपिका पांडेय का पलड़ा भारी हो सकता है। दरअसल वे कांग्रेस में पहले से हैं, अनुभवी हैं और शीर्ष नेतृत्व की नजरों में रही हैं। कांग्रेस के उम्मीदवार चार आदिवासी सीटों पर भी चुनाव जीते हैं। इनमें कोलेबिरा से विक्सल कोंगाड़ी की दूसरी जीत है। उनकी छवि ठीक है और वे संघर्षशील रहे हैं। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं, समर्थकों की नजर इस ओर भी लगी है। झामुमो के लिए दिक्कत यह भी है कि कांग्रेस पांच मंत्री चाहता है। तब झामुमो के पास भी पांच जगह रह जाएगी। कांग्रेस का तर्क है कि विस अध्यक्ष का पद झामुमो को दिया गया है। कांग्रेस की नजर कई वैसे विभागों पर है जो झामुमो को खटक रहा है। झामुमो खेमे से मिली जानकारी के मुताबिक कांग्रेस से बात सलट जाने के बाद ही हेमंत सोरेन झामुमो से मंत्रियों के नाम और विभाग का चयन करना चाहते हैं। पूर्ण बहुमत की स्थिति में हेमंत सोरेन इस मसले को और ज्यादा दिन तक लटकाना नहीं चाहते, लेकिन झामुमो में भी दर्जनभर दिग्गज मंत्री पद के दावेदार हैं। कई लोगों ने इसबार हेमंत सोरेन से दो टूक कह दिया है कि उन्हें जगह मिलनी चाहिए। झामुमो विधायकों की भी सीधी नजर फैसले पर है। बुधवार को खरमास खत्म होनेवाला है। अबतक यही कहकर मंत्रिमंडल विस्तार को टाला जाता रहा है कि खरमास के बाद सब कुछ तय हो जाएगा। कैबिनेट का गठन और विभागों का बंटवारा नहीं होने से सरकार का काम भी गति नहीं पकड़ सका है। अगले महीने से बजट सत्र की संभावना है। जाहिर है विभागों के बंटवारे के बाद ही सरकार का काम जोर पकड़ेगा।

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