ऑयल एवं गैस कंजरवेशन-2020 सक्षम ’संरक्षण क्षमता महोत्सव’ के उद्घाटन पर बोलीं राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू

रांची: हाईड्रोकार्बन की हमारे देश की आर्थिक वृद्धि की गति को बनाए रखने में महती भूमिका है। वर्तमान में भारत विश्व में उर्जा का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। पेट्रोंलियम उत्पादों की बढ़ती हुई मांग के उच्च बने रहने की संभावना है, क्योंकि तेल और प्राकृतिक गैस का योगदान देश में कुल उर्जा आवश्यकता के एक तिहाई से अधिक है। मुझे प्रसन्नता है कि तेल और गैस कंपनियों के साथ-साथ ही पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान संगठन द्वारा पूरे देश में 16 जनवरी 2020 से 15 फरवरी 2020 की अवधि के दौरान तेल और गैस संरंक्षण अभियान आयोजित किया जाएगा। जिसका विषय ‘सक्षम-2020’ है। इस कार्यक्रम में आप सभी के मध्य सम्मिलित होकर मुझे प्रसन्नता हो रही है। राज्यपाल ने उक्त बातें ऑयल एवं गैस कंजरवेशन-2020 सक्षम ’संरक्षण क्षमता महोत्सव’ के उद्घाटन के मौके पर कहीं। उन्होंने कहा कि घरेलू तेल और गैस की सीमित उपलब्धता को देखते हुए भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 80 प्रतिशत आयात कर रहा है। इस भारी आयात निर्भरता और हमारे आर्थिक संसाधनों पर इसके उत्तरवर्ती दबाव को देखते हुए पेट्रोंलियम उत्पादों का संरंक्षण करने पर विशेष बल देने की आवश्यकता है। प्रकृति में संसाधन सीमित हैं। दूसरे शब्दों में प्रकृति में उपलब्ध उर्जा भी सीमित है। इस बढ़ती जनसंख्या के साथ मनुश्य की आवश्यकताएं भी बढ़ती ही जा रही हैं। दिन-प्रतिदिन सड़कों पर मोटर-गाड़ियों की संख्या में अतुलनीय वृद्धि हो रही है। रेलगाड़ी हो या हवाई जहाज सभी की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। पेट्रोलियम उत्पादों का और अधिक महत्वपूर्ण रुप से संरक्षण अनिवार्य हैै। जिससे जलवायु परिवर्तन संबंधी चिंताओं का समाधान किया जा सके और भावी पीढ़ियो के लिए स्वस्थ जीवनयापन के लिए अपने पर्यावरण को तथा दीर्घकालिक विकास को सुरक्षित किया जा सके। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि पेट्रोंलियम का बेहतर और ज्यादा कुशल उपयोग करके इसे संरक्षित किया जाए, ताकि इसके परिणामस्वरुप उर्जा के कुशलतम उपयोग खर्चीली पद्धतियों को न्यूनतम करने और पर्यावरण को संरक्षित करने कि उपलब्धि हासिल की जा सके। उन्होंने कहा कि यह केवल तभी संभव हो पाएगा जब उद्योग, व्यक्तिगत नागरिक, संगठन, तेल कंपनियां और सरकार पेट्रोंलियम संरक्षण की सामूहिक जिम्मेदारी में भागीदारी करें, ताकि उर्जा के उपलब्ध संसाधनों का संरंक्षण किया जा सके और भावी पीढ़ियो के लिए स्वच्छ पर्यावरण का निर्माण किया जा सके। हम सभी को खाना पकाने, परिवहन, कृषि और उद्योगों में पेट्रोंलियम उत्पादों का प्रयोग करते समय सामान्य, सरल, आसानी से इंम्पीलिमेंटेशन योग्य उपायों को अपना कर तेजी से समाप्त हो रहे पेट्रोंलियम संसाधनों का संरंक्षण करने की मुहिम में शामिल होना चाहिए, ताकि इन संसाधनों के इष्टतम उपयोग और कार्य कुशलता को हासिल किया जा सके। इससे हमें धन को बचाने और तेल उत्पादन तथा खपत से संबंधित प्रतिकूल सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण संबंधी प्रभावों, जिसमें वायु प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, जल प्रदूषण, आयात पर निर्भरता आदि शामिल है, को समाप्त करने में भी मदद मिलेगी। इस वर्ष यह प्रस्ताव है कि तेल और गैस कंपनियों के साथ-साथ ही पेट्रोंलियम संरक्षण अनुसंधान संगठन द्वारा पूरे देश में 16 जनवरी से 15 फरवरी 2020 की अवधि के दौरान तेल और गैस संरंक्षण अभियान आयोजित किया जाएगा, जिसका विषय ‘सक्षम-2020’ है। आशा है कि इस अवधि के दौरान व्यापक कार्यकलापों के जरिए पेट्रोंलियम संरक्षण से संबंधित आवश्यकता, मुद्दे और उनके समाधान के बारे में जनता की जागरुकता बढ़ाई जाएगी तथा वे पेट्रोंलियम उत्पादों के प्रभावी उपयोग के संबंध में सक्षम हो सकेंगे। जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण संरंक्षण के प्रयास तेज होंगें। मैं प्रत्येक नागरिक से अपील करती हूं कि वे सरल और सुगम कार्यान्वयन योग्य ईंधन संरक्षण उपयोें को अपने जीवन के एक अनिवार्य भाग के रुप में अपनाएं और राष्ट्र की उर्जा सुरक्षा को प्राप्त करने की दिशा में पूरे मन से अपना समर्थन दें।

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